बेबाक और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए राहुल कोटियाल सम्मानित

बेबाक और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए राहुल कोटियाल सम्मानित
चौथे पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजे गए, भारत भूषण बोले— पत्रकार अपनी प्रहरी की भूमिका न भूलें
राहुल कोटियाल को चौथा पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार
पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए-भारत भूषण
मिली एक लाख रुपये की सम्मान राशि
देहरादून,। वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑनलाइन पोर्टल ‘बारामासा’ के संस्थापक संपादक राहुल कोटियाल को उनकी निष्पक्ष, बेबाक और साहसी पत्रकारिता के लिए चौथे पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कर्मभूमि फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए गए इस पुरस्कार में एक लाख रुपये की धनराशि, शॉल और प्रशस्ति पत्र शामिल है।
दून लाइब्रेरी में आयोजित समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘मेल टुडे’ के संस्थापक संपादक भारत भूषण मुख्य अतिथि रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
फाउंडेशन के सचिव कैप्टन हिमांशु धूलिया ने पंडित भैरव दत्त धूलिया के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका तथा ‘कर्मभूमि’ समाचार पत्र के संपादक के रूप में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश नवानी ने पत्रकारिता में मिशनरी भावना को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मीडिया का दायित्व उन लोगों की आवाज बनना है, जो स्वयं अपनी बात नहीं रख सकते।
इसके बाद कर्मभूमि फाउंडेशन के सचिव हिमांशु धूलिया ने पुरस्कार प्रशस्ति पत्र का वाचन किया और मुख्य अतिथि ने राहुल कोटियाल को सम्मान प्रदान किया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद राहुल कोटियाल ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है। उन्होंने स्वतंत्र और ईमानदार पत्रकारिता के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि अखबारों के लिए विज्ञापन नहीं, बल्कि विज्ञापनों के लिए अखबार बनाए जा रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार और सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि भारत भूषण ने पत्रकारिता में विचारधारा की भूमिका और बदलते मीडिया परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक भारत में पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं थी, बल्कि जनजागरण का भी सशक्त साधन थी।
उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता मीडिया में आत्म-सेंसरशिप को बढ़ावा देती है। साथ ही उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए तथा समाचार, विश्लेषण और विचार को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
अंत में कर्मभूमि फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती धूलिया ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।



