जमरानी बांध परियोजना की आड़ में बड़ा खेल-डौली रेंज कार्यालय के पास खुलेआम चल रहा अवैध खनन, सरकारी दावों की खुली पोल”
जमरानी बांध परियोजना की आड़ में बड़ा खेल-डौली रेंज कार्यालय के पास खुलेआम चल रहा अवैध खनन, सरकारी दावों की खुली पोल”
रिपोर्टर गौरव गुप्ता
लालकुआँ -प्रदेश सरकार भले ही अवैध खनन पर पूरी तरह से नकेल कसने और खनन माफियाओं की कमर तोड़ने के तमाम बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन धरातल पर तस्वीर इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ताजा मामला तराई पूर्वी वन प्रभाग की गौला रेंज से सामने आया है।
जहां तराई पूर्वी वन प्रभाग के डौली रेंज कार्यालय के ठीक नाक के नीचे अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध धंधे को अंजाम देने के लिए विकास कार्यों की आड़ ली जा रही है जिससे वन विभाग और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*जमरानी बांध परियोजना की आड़ में चल रहा संगठित खेल
लालकुआँ क्षेत्र में इन दिनों बहुचर्चित जमरानी बांध परियोजना के तहत नहर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में मिट्टी, बजरी और रिवर बेड मटेरियल (आरबीएम) निकाला जा रहा है।
नियमों के मुताबिक, इस सामग्री का इस्तेमाल तय विकास कार्यों या शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत किया जाना चाहिए था। लेकिन, शातिर खनन माफियाओं ने इस विकास परियोजना को ही अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। माफिया वैध परमिशन या परियोजना के नाम की आड़ लेकर इस बेशकीमती खनिज संपदा को रातों-रात ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं।
कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर दिन-रात गरज रहीं जेसीबी
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार किसी सुनसान जंगल में नहीं, बल्कि डौली रेंज कार्यालय के समीप चल रहा है। कानून के रखवाले कहे जाने वाले वन विभाग के दफ्तर के इतनी करीब चल रहे इस अवैध खनन ने सिस्टम की लाचारी या फिर मिलीभगत को जगजाहिर कर दिया है।
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां दिन के उजाले से लेकर घनी अंधेरी रातों तक जेसीबी मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। भारी-भरकम जेसीबी की मदद से ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अवैध रूप से आरबीएम और बजरी भरकर धड़ल्ले से बाहर भेजी जा रही है।
सरकारी राजस्व को लग रहा करोड़ों का चूना
माफियाओं के इस बेखौफ रवैये के चलते सरकार को हर महीने लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पर्यावरण को भी इस अंधाधुंध दोहन से भारी क्षति पहुंच रही है। एक तरफ जहां सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की नीति का राग अलापती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों की कथित चुप्पी इन माफियाओं के हौसले बुलंद कर रही है।
*बड़ा सवाल: आखिर कब जागेगा प्रशासन
डौली रेंज कार्यालय के पास चल रहे इस अवैध खनन का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् यह सवाल पूछने पर मजबूर हैं कि क्या वन विभाग के अधिकारियों को अपने ही कार्यालय के पास चल रहे इस खेल की भनक नहीं है? यदि जानकारी है, तो अभी तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बहरहाल, देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद शासन के उच्च अधिकारी और तराई पूर्वी वन प्रभाग का प्रशासन इस मामले में क्या कड़े कदम उठाता है, या फिर हमेशा की तरह कागजी कार्रवाई कर इस मामले को दबा दिया जाता है।
इधर सूचना के बाद गौला रेंज की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल बताया जा रहा इस खेल में कई लोग शामिल हैं।



