उत्तराखंड

बरेली में हर्षोल्लास से मनाया गया हरेला पर्व, लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

बरेली सतेन्द्र प्रताप सिंह 

मानव सेवा संस्थान ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत नें पर्वतीय हरियाली लोक कथाओ व्यंजनों नृत्य संस्कृति के साथ महानगर बरेली में बड़े ही हर्षोल्लास उल्लास से मनाया हरेला का त्यौहार राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया ने हरेला के महत्व में बताया हरेला पर्व प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देता है त्योहार के दौरान लोग अपने घरों में सात प्रकार के बीजों को उगते हैं उगने बाद बड़ेजन छोटेजनों के सिर पर आशीर्वाद के रूप में रखा जाता है पर्वतीय पौराणिक मानता है इस पर्व का संबंध भगवान शिव माता पार्वती के दिव्य विवाह से भी जोड़ा जाता है हरेला उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला एक प्रमुख कृषि और सांस्कृतिक मानसून के आगमन पर प्रकृति के प्रति सम्मान पर्यावरण संरक्षण और अच्छी फसल की कामना का प्रतीक लोकपर्व है बीजो, पौधों, द्वारा पर्वतीय व सामान्य भूमि को खुशियों से हरा भरा और वृक्षारोपण करने का त्यौहार है इस दिन पारिवारिक और सामाजिक समरसता: परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पारंपरिक व्यंजन पुआ, उड़द की दाल के बड़े, खीर बनाते हैं और रिश्तेदारों पड़ोसियों से मिलकर खुशियां और प्रेम से मिल बॉट ग्रहण कर हरेला का त्यौहार मानते हैं हरेला पर्व के मौके पर राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया, राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश मेहंदीरत्ता, जिला अध्यक्ष अंजू शुक्ला,तरुण कपूर, अनीता सोलंकी, रेनू शर्मा, बबीता शर्मा, कंचन सिंह, अंजू ठाकुर, राम किशोर आदि सदस्य गण मौजूद रहे।

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