कुर्बानी का त्योहार त्याग, प्रेम और इंसानियत का संदेश देता है: अधिवक्ता राव बिलावर

कुर्बानी के मौके पर अधिवक्ता राव बिलावर ने कहा है कि असल कुर्बानी वही है जिसमें इंसान अपने अहंकार और बुरी आदतों को छोड़ दे। उन्होंने कहा कि त्योहार पर अपनी खुशियों में गरीबों और जरूरतमंदों को शामिल करना चाहिए क्योंकि बांटने से ही त्यौहार की खुशी बढ़ती है।
राव बिलावर ने बताया कि कुरान और हदीस शरीफ में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कुर्बानी केवल जानवर की बलि देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने गुस्से और अंदर की बुराइयों को छोड़ना भी बड़ी कुर्बानी मानी जाती है।
उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: “मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे लोग सुरक्षित रहें।” (Sahih al-Bukhari) साथ ही उन्होंने Sahih Muslim की एक हदीस भी उद्धृत की: “आसानी पैदा करो, कठिनाई मत पैदा करो, खुशखबरी दो और नफरत मत फैलाओ।”
राव बिलावर ने कहा कि इस्लाम दूसरों की भावनाओं, सम्मान और शांति का ध्यान रखना सिखाता है और अच्छा इंसान वही है जो अपने व्यवहार से मोहब्बत और भाईचारा फैलाए। उन्होंने नागरिकों से कानून, सफाई और शांति का पालन करने का आग्रह भी किया और कहा कि यह एक जिम्मेदार नागरिक और अच्छे इंसान की पहचान है।



