उत्तराखंड

बिंदुखत्ता में राजस्व ग्राम की मांग को लेकर पदयात्रा जारी, सैकड़ों लोगों ने घर-घर किया जनजागरण

भादो के महीने में खाल जला देने वाली धूप में भी बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर पदयात्रा जारी रही, पांचवे दिन दिन सैकड़ों लोगों ने घर-घर पहुंचकर किया जनजागरण

रिपोर्टर गौरव गुप्ता

बिंदुखत्ता, 19 अगस्त 2026। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने की मांग को लेकर स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से शुरू हुई घर-घर जनजागरण पदयात्रा के तीसरे दिन आज पदयात्रा माँ हाटकालिका मंदिर, इंदिरा नगर -2 से शुरू होकर इंद्रानगर गब्दा के मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।

सुबह से आसमान में बादल छाये हुए थे फिर 10 बजे के बाद चटक धूप में सैकड़ों की तादात में ग्रामीण इस पदयात्रा में चलते रहे। वन अधिकार संगठन, पूर्व सैनिक संगठन, राज्य आंदोलनकारी तथा विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। सैकड़ों की संख्या में लोग घर-घर पहुंचे और ग्रामीणों को बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग तथा इसके लिए चलाए जा रहे आंदोलन के बारे में जागरूक किया।

पदयात्रा के दौरान लोगों से अपील की गई कि बिंदुखत्ता के अधिकारों की इस लड़ाई को मजबूत करने के लिए प्रत्येक परिवार और प्रत्येक नागरिक अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे। वक्ताओं ने कहा कि राजस्व ग्राम का दर्जा केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि बिंदुखत्ता के लोगों के पंचायत, विकास और मूलभूत नागरिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।

पदयात्रा में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पदयात्रा संयोजक दीपक जोशी एडवोकेट, बलवंत बिष्ट, भरत नेगी, भगवान सिंह धामी, नंदन बोरा, सुशील यादव, नवीन जोशी, भूपेश जोशी, ममता बिष्ट, राधा दानू, संध्या डालाकोटी, दीपक रौतेला, प्रकाश जोशी, उत्तराखंडी, सोहन लाल, दीपक पाठक, वीरेंद्र दानू, मनोज दानू, नंदन जग्गी, सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

आयोजकों ने कहा कि यह पदयात्रा बिंदुखत्ता के प्रत्येक गांव और प्रत्येक घर तक पहुंचेगी। बारिश, धूप और किसी भी कठिन परिस्थिति की परवाह किए बिना अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा और 27 सितंबर को शहीद स्मारक स्थल पर एक विशाल जनसभा और रैली का आयोजन किया जाएगा । बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर चल रहे इस जनअभियान में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना और निर्णायक संघर्ष के लिए जनमत तैयार करना ही पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य है।

 

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