“हम शर्मिंदा हैं क्योंकि अपराधी जिंदा हैं”: छात्रों के अधिकारों की रक्षा को लेकर राष्ट्रपति को कांग्रेस का प्रार्थना पत्र

रिपोर्ट गौरव गुप्ता।
नई दिल्ली।
बढ़ती असहिष्णुता, पेपर लीक के विरुद्ध छात्र आंदोलनों पर हमले और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के संबंध में प्रार्थना पत्र।
भारत के संविधान में पूर्ण आस्था और सम्मान के साथ मैं आपका ध्यान लोकतंत्र की स्थिति, छात्रों के अधिकारों और हमारी परीक्षा प्रणाली में जनता के विश्वास से जुड़े एक अत्यंत गंभीर विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
हाल के समय में देशभर के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ जंतर मंतर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। ये छात्र संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों से अधिक कुछ नहीं मांग रहे हैं – अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमा के साथ जीने का अधिकार।
यह अत्यंत पीड़ादायक है कि अपनी बात सुने जाने के बजाय, हमारे देश का भविष्य कहे जाने वाले ये युवा नागरिक उस व्यवस्था द्वारा ही लाठीचार्ज, हिरासत और भयभीत किए जा रहे हैं जिसका कर्तव्य उनकी रक्षा करना है। इस प्रकार की कार्यवाहियों से युवाओं में असहायता, भय और असहिष्णुता की भावना उत्पन्न हो रही है जो कि भारत के भविष्य विधाता हैं ।
बार-बार हो रहे पेपर लीक ने उन लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों का विश्वास तोड़ दिया है जो वर्षों तक ईमानदारी से तैयारी करते हैं। जब शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध का जवाब बल से दिया जाता है, तो यह आभास होता है कि अपने ही देश में सच बोलना अपराध बन गया है।
दमन के इस माहौल ने कई छात्रों को घोर निराशा की स्थिति में पहुंचा दिया है। यह “इच्छामृत्यु” जैसी पीड़ा की अभिव्यक्ति है, जिसका अर्थ है कि उन्हें लग रहा है कि उनके सपने, उनकी मेहनत और उनके संवैधानिक अधिकार प्रतिदिन कुचले जा रहे हैं, जिसके तहत दर्जनों छात्र- छात्राओं ने अपनी जान देकर भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अविश्वास प्रकट किया और पूरे देश को झकझोर दिया । पूरे विश्वय में देश की निंदा हो रही है। हम शर्मिंदा है क्योंकि अपराधी जिंदा हैं ।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों की आवाज सुनें, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच कराएं और संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करें।



