उत्तराखंड

लालकुआं भाजपा में सियासी तापमान चरम पर, कहीं ‘बाहरी-भीतरी’ की तलवारें तो कहीं ‘क्रेडिट वार’ का संग्राम!

रिपोर्टर गौरव गुप्ता।

“एक अनार, सौ बीमार” वाली कहावत इन दिनों लालकुआं की राजनीति पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन टिकट, ताज और तख्त की लड़ाई ने भाजपा के भीतर सियासी पारा अभी से उबाल पर पहुंचा दिया है।

लालकुआं। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की अंदरूनी राजनीति इन दिनों किसी राजनीतिक धारावाहिक से कम नहीं दिख रही। कहीं “बाहरी बनाम भीतरी” को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं तो कहीं फुटओवर ब्रिज और सड़कों के टल्लों के क्रेडिट को लेकर घमासान मचा हुआ है। फिलहाल वर्तमान में “देबू दा बनाम मोहन दा” का नया एपिसोड सुर्खियां बटोर रहा है। कुल मिलाकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में सियासी तापमान चरम पर पहुंच चुका है।

बता दें कि हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन दुम्का ने बिना नाम लिए “पैराशूट प्रत्याशी” और बाहरी नेताओं को लेकर जो बयान दिया, उसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। माना गया कि उनका इशारा भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे और भाजपा नेता दीपेंद्र कोश्यारी की ओर था, जिनकी क्षेत्र में सक्रियता लगातार बढ़ रही है।

नवीन दुम्का ने साफ कहा था कि लालकुआं की जनता बाहरी प्रत्याशी स्वीकार नहीं करेगी और क्षेत्र में वर्षों से संघर्ष कर रहे स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद “भीतरी बनाम बाहरी” की बहस ने भाजपा के भीतर नई हलचल पैदा कर दी।

उधर, सड़कों के टल्लों के क्रेडिट का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि फुटओवर ब्रिजों के श्रेय को लेकर भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री देवेंद्र सिंह बिष्ट ‘देबू दा’ और विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट मोहन दा के बीच “क्रेडिट संग्राम” शुरू हो गया। देबू दा का दावा है कि दिल्ली की दौड़-धूप उन्होंने की, ज्ञापन उन्होंने दिए और अब फोटो कोई और खिंचवा रहा है।

क्षेत्र में लोग अब मजाकिया अंदाज में कहने लगे हैं—

“भाजपा में इन दिनों विकास कम,

क्रेडिट एपिसोड ज्यादा रिलीज हो रहे हैं!”

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति है। हर नेता जनता के बीच अपनी मौजूदगी और पकड़ दिखाने में जुटा हुआ है।

विपक्ष भी भाजपा की इस अंदरूनी खींचतान पर जमकर चुटकी ले रहा है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा में फिलहाल विकास कार्यों से ज्यादा “टिकट पूर्व अभ्यास” चल रहा है।

एक स्थानीय विपक्षी नेता ने तंज कसते हुए कहा—

“अभी टिकट घोषित नहीं हुए हैं,

लेकिन तलवारें ऐसे खिंच गई हैं

मानो चुनाव कल सुबह ही हो!”

चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाएं गर्म हैं। कोई “देबू दा वर्सेस मोहन दा” पर मीम बना रहा है तो कोई “भीतरी-बाहरी महासंग्राम” पर राजनीतिक व्यंग कस रहा है।

फिलहाल लालकुआं में जनता यही कह रही है—

“पुल अभी बने नहीं,

टिकट अभी मिले नहीं,

लेकिन राजनीति पूरी स्पीड में दौड़ रही है!”

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