उत्तराखंड

वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता ने शासन-प्रशासन पर उठाए सवाल, राज्य स्तरीय समिति से पक्ष रखने की मांग

रिपोर्टर गौरव गुप्ता।

लालकुआं। वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता की बैठक में उत्तराखंड शासन एवं जिलाधिकारी नैनीताल पर नियम विरुद्ध काम करने का आरोप लगाते हुए शासन प्रशासन के उक्त निर्णय पर आपत्तियां लगाकर राज्य स्तरीय समिति से वनाधिकार समिति का पक्ष सुनने की मांग की है।

बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर में आयोजित वनाधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बनाधिकार समिति द्वारा तैयार किए गए संयुक्त दावों की फाइल को पहले खंड स्तरीय समिति फिर जिला स्तरीय और उसके बाद शासन में प्रस्ताव पारित करके फाइल भेज दी गई, परंतु 16 माह तक उक्त फाइल को शासन स्तर पर लटकाने के बाद उसे पुनः जिला स्तरीय समिति को भेज दिया गया, तथा जिलाधिकारी द्वारा उक्त फाइल में कई आपत्तियां लगाकर उसे खंड स्तरीय समिति को वापस भेज दिया, जिससे बिंदुखत्ता वासी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले में उत्तराखंड शासन और जिला स्तरीय समिति में जिलाधिकारी द्वारा नियम विरुद्ध कार्य किया है, उक्त पत्रावली में लगाई गई आपत्तियों पर वनाधिकार समिति ने शासन में अपना पक्ष रखने के लिए राज्य निगरानी समिति को पत्र भेजा है, जिसमें मांग की गई है कि उनकी पत्रावली पूरी तरह वैध एवं पूर्ण है, जिस पर बेवजह आपत्तियां लगाई जा रही है, उक्त आपत्तियों के निस्तारण के लिए वनाधिकार समिति का भी पक्ष सुना जाए। लगभग 5 घंटे चली उक्त बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी
भगवान धामी ने की, जबकि संचालन दीपक जोशी ने किया।

कार्यक्रम में समिति के सचिव भुवन भट्ट, आरसी पुरोहित, रमेश देवराड़ी, भुवन शर्मा, दीपक नेगी, बलवंत सम्मल, प्रमोद कालोनी, कमल जोशी, नंदन बोरा, इन्द्र सिंह पनेरी, पंकज कोरंगा, दीपक सुयाल, बसन्त पाण्डेय, हरेंद्र रौतेला, प्रताप कोश्यारी, विक्रम सिंह और आनंद सिजवाली मौजूद रहे।

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