उत्तराखंड

आचार्य अभ्यास वर्ग में गूंजा संदेश: संस्कारयुक्त शिक्षा और नवाचार से होगा राष्ट्र निर्माण

बरेली रिपोर्टर, सतेन्द्र प्रताप सिंह 

शिशु केंद्रित शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास संभव: रामकिशोर श्रीवास्तव

संस्कार मूलक शिक्षक एवं नवाचार से ही होगा शिक्षा का उन्नयन: सुनील सिंह पुंडीर

आचार्यो को करना होगा भारतीय शिक्षा दर्शन के अनुरूप शिक्षण: दिनेश मलिक

बरेली, स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर नैनीताल मार्ग बरेली एवं नेकपुर विद्यालय में शिशु शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित बरेली जिले का आचार्य अभ्यास वर्ग उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ बरेली संभाग के जिला समन्वयक सुनील कुमार सिंह पुंडीर, प्रदेश शिशु वाटिका प्रभारी रामकिशोर श्रीवास्तव, अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, बाल कल्याण समिति के मंत्री दिनेश मलिक, राजीव सक्सेना ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया। प्रधानाचार्य संजीव कुमार पाण्डेय ने सभी अतिथियों का अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत किया।

इस अभ्यास वर्ग में जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों के आचार्यों ने सहभागिता करते हुए नवीन शिक्षण पद्धतियों, संस्कारमूलक शिक्षा तथा विद्यालयीन कार्यों के प्रभावी संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शिशु शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश के जिला मीडिया प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया

अभ्यास वर्ग दो स्थानों पर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर नेकपुर एवं नैनीताल मार्ग बरेली में संपन्न हुआ प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ शिक्षाविदों जिसमें डी.एन. मिश्रा, शिवलेश पांडे, अवनेंद्र शास्त्री एवं तपेंद्र कटारा डॉ शिव दयाल, डॉ पुष्पेंद्र,डॉ ऋषभ मिश्रा, डॉ सतीश शर्मा ने भारतीय शिक्षा दर्शन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, बालक-केंद्रित शिक्षण, कक्षा प्रबंधन, मूल्यपरक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास तथा विद्यालय में संस्कार निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आचार्य केवल ज्ञान के प्रदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र के भावी नागरिकों के चरित्र निर्माण के प्रमुख शिल्पी हैं। इसलिए प्रत्येक आचार्य का आचरण, अनुशासन एवं समर्पण विद्यार्थियों के जीवन पर स्थायी प्रभाव डालता है।

वर्ग में योग, समूह चर्चा, शिक्षण प्रदर्शन एवं व्यवहारिक सत्रों का आयोजन भी किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से आचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विद्यालयों में नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों को अपनाने का संकल्प लिया।

समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि ऐसे अभ्यास वर्ग शिक्षकों की दक्षता, कार्यकुशलता एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी आचार्यों ने राष्ट्र निर्माण, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। प्रधानाचार्य संजीव कुमार पांडेय ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर पूरे जिले के सभी 20 प्रधानाचार्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य मनोज शर्मा ने किया।

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