देहरादून में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती 31 मई को मनाई जाएगी

देहरादून। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर 31 मई 2026 को देहरादून में भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति द्वारा समाज के लोगों से कार्यक्रम में परिवार सहित शामिल होने की अपील की गई है।
समिति के अनुसार यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की विरासत, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके आदर्शों, प्रशासनिक क्षमता, नारी सम्मान और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया जाएगा।
समारोह में दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण, विचार गोष्ठी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रतिभा सम्मान समारोह तथा महिला शक्ति एवं युवा जागरण जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
आयोजन समिति ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने कठिन परिस्थितियों में भी लगभग 28 वर्षों तक सफल शासन कर न्याय, सेवा और जनकल्याण की मिसाल पेश की। उनके द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण सहित देशभर में कई धार्मिक एवं लोककल्याणकारी कार्य कराए गए।
कार्यक्रम 31 मई, रविवार को प्रातः 10 बजे से एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, मोथरोवाला, देहरादून में आयोजित होगा। समिति ने समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर
301वीं जयंती समारोह
पाल, होल्कर, बघेल, धनगर एवं गड़रिया समाज के मेरे सम्मानित भाईयों, माताओं, बहनों और युवा साथियों…
31 मई केवल एक कार्यक्रम की तारीख नहीं है…
यह वह दिन है, जब हमें अपनी महान विरासत, अपने स्वाभिमान और अपनी पहचान को याद करना है।
जिस महान लोकमाता ने 17वीं शताब्दी में धर्म, न्याय, सेवा, नारी सम्मान और राष्ट्र निर्माण की ऐसी मिसाल दी, जिसे आज पूरा भारत श्रद्धा से नमन करता है…
क्या हम उनकी 301वीं जयंती पर एकजुट होकर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ घंटे भी नहीं निकाल सकते…?
सोचिए साथियो…
अगर आज हम अपनी महान विभूतियों को भूल गए,
तो आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास, अपने संघर्ष और अपने गौरव को कैसे जान पाएंगी…?
यह केवल एक समारोह नहीं…
यह समाज की एकता, जागृति और आने वाले भविष्य की नींव रखने का संकल्प है।
यह वह अवसर है जहाँ हम दुनिया को दिखाएंगे कि हमारा समाज जाग चुका है, संगठित है और अपनी महान विरासत पर गर्व करता है।
इसलिए आप सभी से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है-
31 मई 2026 को अपने सभी निजी कार्यों से ऊपर उठकर, परिवार सहित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में अवश्य पहुँचे।
आपकी एक उपस्थिति समाज की ताकत बढ़ाएगी।
आपका एक कदम आने वाली पीढ़ियों का भविष्य मजबूत करेगा।
दिनांक : 31 मई 2026, रविवार
समय : प्रातः 10 बजे से
स्थान : एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, मोथरोवाला, देहरादून
– दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण
– प्रेरणादायी विचार गोष्ठी
– सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
– प्रतिभा सम्मान समारोह
– महिला शक्ति एवं युवा जागरण
“आइए, लोकमाता के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें।”
📞 संपर्क : 81717 56912 (DK Pal)
विशेष सूचना :
कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु 51 सम्मानित पाल बंधुओं का संयोजक मंडल बनाया जाएगा —
यह समाज को नई दिशा देने वाली एक ऐतिहासिक शुरुआत होगी।
मत सोचिए कि आपके बिना भी कार्यक्रम हो जाएगा बल्कि यह सोचिए कि आपके आने से कार्यक्रम की ताकत कितनी बढ़ जाएगी।
आइए…
अपने महापुरुषों के सम्मान में,
अपने समाज के स्वाभिमान में,
और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए-
31 मई को देहरादून पहुँचकर इतिहास रचिए। 🌺
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर
301वीं जयंती समारोह
प्रिय समाजबंधुओ,
31 मई केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी विरासत, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है।
आइए, लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी के आदर्शों को याद करते हुए समाज की शक्ति और जागरूकता का परिचय दें।
आप सभी से विनम्र निवेदन है कि परिवार सहित इस ऐतिहासिक आयोजन में अपनी उपस्थिति अवश्य सुनिश्चित करे
“आपकी एक उपस्थिति समाज की ताकत बढ़ाएगी।”
Ahilyabai Holkar की निपुणता, बहादुरी और अद्भुत शासन क्षमता
1767 में जब अहिल्याबाई होल्कर ने राज्य संभाला, तब परिस्थितियाँ बहुत कठिन थीं।
पति, ससुर और पुत्र — तीनों का निधन हो चुका था।
चारों ओर विरोधी ताकतें सक्रिय थीं और बहुत लोगों को लगता था कि एक महिला राज्य नहीं चला पाएगी।
लेकिन अगले लगभग 28 वर्षों तक उन्होंने ऐसा शासन दिया कि आज भी उनका नाम “लोकमाता” के रूप में लिया जाता है।
1. संकट में भी अडिग नेतृत्व
राज्य संभालते ही कई सरदारों और बाहरी शक्तियों ने होल्कर राज्य को कमजोर समझकर हमला और षड्यंत्र शुरू किए।
लेकिन अहिल्याबाई ने —
सेना को संगठित किया
योग्य सेनानायकों को जिम्मेदारी दी
सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की
उन्होंने युद्धभूमि में भी साहस दिखाया और जरूरत पड़ने पर स्वयं नेतृत्व किया।
2. प्रशासनिक निपुणता
उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी — न्याय और अनुशासन।
वे प्रतिदिन खुला दरबार लगाती थीं जहाँ कोई भी व्यक्ति सीधे अपनी समस्या रख सकता था।
उनके शासन की प्रमुख बातें —
भ्रष्ट अधिकारियों को दंड
किसानों पर कम कर
व्यापारियों को सुरक्षा
महिलाओं और गरीबों की सहायता
तेज न्याय व्यवस्था
उनके राज्य में चोरी और अत्याचार बहुत कम माने जाते थे।
3. आर्थिक शक्ति बढ़ाना
अहिल्याबाई ने केवल युद्ध नहीं किए, बल्कि राज्य को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाया।
उन्होंने —
व्यापार मार्ग सुरक्षित करवाए
बाजार विकसित किए
कृषि को प्रोत्साहन दिया
जल व्यवस्था सुधारी
Maheshwar को उन्होंने सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र बना दिया।
महेश्वरी साड़ियों की परंपरा भी उनके समय में प्रसिद्ध हुई।
4. धर्म और राष्ट्र सेवा
उनकी सबसे बड़ी पहचान केवल महारानी नहीं, बल्कि धर्मरक्षक और जनसेवक शासक की रही।
उन्होंने पूरे भारत में मंदिर, घाट और धर्मशालाएँ बनवाईं।
मुख्य कार्य —
Kashi Vishwanath Temple का पुनर्निर्माण
Somnath Temple का जीर्णोद्धार
Haridwar और Rishikesh में घाट
तीर्थ यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ
उन्होंने उत्तर से दक्षिण तक सैकड़ों धार्मिक और लोककल्याणकारी कार्य करवाए।
5. उनकी बहादुरी का सबसे बड़ा प्रमाण
उस समय महिलाओं को शासन और युद्ध से दूर रखा जाता था।
फिर भी अहिल्याबाई ने —
मराठा राजनीति में सम्मान प्राप्त किया
बड़े-बड़े सरदारों को प्रभावित किया
राज्य को स्थिर और समृद्ध बनाया
इतिहासकारों के अनुसार उनके शासन में प्रजा उन्हें “माँ साहब” कहकर पुकारती थी, क्योंकि वे केवल शासक नहीं, बल्कि संरक्षक की तरह काम करती थीं।
6. उनकी व्यक्तिगत सादगी
इतना बड़ा साम्राज्य होने के बावजूद —
वे साधारण वस्त्र पहनती थीं
धार्मिक और अनुशासित जीवन जीती थीं
राजकोष का उपयोग जनता के हित में करती थीं
उन्होंने कभी विलासिता को महत्व नहीं दिया।
7. उनके शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि
उनके शासनकाल में —
मालवा क्षेत्र समृद्ध हुआ
जनता सुरक्षित रही
व्यापार बढ़ा
धर्मस्थलों का पुनर्जीवन हुआ
होल्कर राज्य पूरे भारत में सम्मानित हुआ
इसीलिए Ahilyabai Holkar को भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ महिला शासकों में गिना जाता है।



