उत्तराखंडराजनीति

CM के मसूरी दौरे पर कोई विकास की घोषणा न करने से लोगों में मायूसी

मसूरी से वरिष्ठ संवाददाता सतीश कुमार की रिपोर्ट: 2 सितंबर मसूरी गोली कांड की बरसी पर मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मसूरी आये पुष्कर सिहं धामी से मसूरी के लोगों को बड़ी अपेक्षा थी कि मसूरी के विकास से संबंधित कोई बड़ी घोषणा जरूर करेंगे, लेकिन उन्होंने कोई घोषणा न कर मसूरी की जनता को मायूस किया है।

मसूरी पहुंचने पर जनता को बहुत उम्मीदें थी, कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मसूरी आए हैं, तो मसूरी वासियों की समस्याओं एवं मसूरी के विकास के लिए मुख्यमंत्री कोई बड़ी घोषणा करेंगे लेकिन मुख्यमंत्री ने मसूरी में किसी भी प्रकार की कोई घोषणा नहीं की जिससे मसूरी वासी मायूस है। जबकि उन्होंने नैनीताल में 100 करोड रुपए की योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया वहीं खटीमा में 215 करोड रुपए की योजनाओं की घोषणा की।

इस संबंध में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कहा कि 2 सितंबर को मसूरी आगमन पर क्षेत्र की जनता को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री मसूरी के विकास के लिए कोई बड़ी घोषणा करेंगे लेकिन अब यहां के निवासी मायूस हैं और उन्हें लगता है कि कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री कुमाऊं और गढ़वाल में भेदभाव कर रहे हैं और गढ़वाल क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में मसूरी विधायक और काबीना मंत्री को भी मुख्यमंत्री से मसूरी के विकास के लिए घोषणा करने की बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई की योजना मुख्यमंत्री के समक्ष नहीं रखी। उन्होंने कहा कि कुमाऊं मंडल में मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपए की घोषणा की है जिससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री गढ़वाल और कुमाऊं में भेदभाव कर रहे हैं। वहीं राज्य आंदोलनकारी प्रदीप भंडारी ने कहा कि मसूरी में आवासीय कॉलोनी की बेहद जरूरत है ताकि यहां के लोगों को छत मुहैया कराई जा सके।

साथ ही उन्होंने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया की कई एकड़ भूमि यहां पर खाली पड़ी है जिस पर खेल मैदान भी है और डबल इंजन की सरकार होने के नाते मुख्यमंत्री को इस ओर ध्यान देना चाहिए था और मसूरी के विकास में अपना अहम योगदान देना चाहिए था लेकिन मुख्यमंत्री ने यहां पर किसी भी विकास योजनाओं के बारे में संज्ञान नहीं लिया जिसके लिए काबीना मंत्री गणेश जोशी को भी कम दोषी नहीं माना जा सकता है। उन्हें भी मुख्यमंत्री के सामने मसूरी के विकास योजनाओं के बाबत अपनी बात रखनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री गढ़वाल की उपेक्षा कर रहे हैं। वही इस संबंध में मसूरी के नागरिक विजेंद्र पुंडीर ने कहा कि सरकार को मसूरी में योजनाओं के संबंध में सही जानकारी नहीं दी गई जिस कारण मुख्यमंत्री यहां आए और बिना किसी घोषणा के यहां से चले गए इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री को मसूरी की समस्याओं से अवगत नहीं कराया गया है।

इस संबंध में मसूरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी के शहीदों की अनदेखी की गई है। मुख्यमंत्री को शहीद स्थल पर संग्रहालय की घोषणा तो कम से कम करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा सरकार उन शहीदों को भुला रही है जिनकी बदौलत आज उत्तराखंड राज्य में वे ऊंचे पदों पर विराजमान है।

 

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