आजाद नगर चोरी कांड: 15 दिन बाद भी लालकुआं पुलिस के हाथ खाली, कोतवाली के पास हुई वारदात का नहीं हुआ खुलासा

आजाद नगर चोरी कांड: 15 दिन बाद भी लालकुआं पुलिस के हाथ खाली, कोतवाली के पास हुई वारदात का नहीं हुआ खुलासा
रिपोर्टर गौरव गुप्ता
लालकुआं। लालकुआं कोतवाली क्षेत्र में चोरों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और पुलिस प्रशासन कितना सुस्त है, इसकी बानगी कोतवाली से महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित आजाद नगर वार्ड-4 में देखने को मिल रही है। बीते 18 अक्टूबर की रात कोतवाली के ठीक पास एक सूने मकान का ताला तोड़कर हुई करीब तीन लाख रुपये की चोरी के मामले में दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस के ‘जल्द खुलासे’ के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार और क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
क्या था पूरा मामला?
बीते 18 अक्टूबर (शनिवार) की रात आजाद नगर वार्ड नंबर-4 निवासी मोहनी देवी (पत्नी स्व. भीम सिंह परिहार) किसी कार्यवश अपनी बेटी के घर दवाईफार्म, नगला गई हुई थीं। मकान में ताला लगा देख शातिर चोरों ने मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ा और अंदर घुसकर अलमारी में रखे लाखों के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। अगले दिन रविवार सुबह पड़ोसियों ने मुख्य दरवाजे का ताला टूटा देख मोहनी देवी को सूचना दी, जिसके बाद वह आनन-फानन में घर पहुंचीं।
तीन लाख के जेवरात और सामान पर किया था हाथ साफ
पीड़िता मोहनी देवी के अनुसार, चोर अलमारी का लॉक तोड़कर उसमें रखे दो सोने के मंगलसूत्र, एक जोड़ी सोने की कान की बालियां, चांदी के 8 सिक्के और अन्य कीमती घरेलू सामान चुरा ले गए थे। चोरी गए सामान की कुल कीमत लगभग तीन लाख रुपये आंकी गई थी।
सिर्फ आश्वासन तक सीमित रही पुलिसिया कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंची लालकुआं पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए थे। तब कोतवाल बृजमोहन राणा ने दावा किया था कि आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और जल्द ही मुकदमा दर्ज कर चोरों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। लेकिन घटना के करीब 15 दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस न तो चोरों का कोई सुराग लगा पाई है और न ही माल बरामद कर सकी है।
क्षेत्रवासियों में रोष और दहशत का माहौल
कोतवाली के इतने करीब हुई इस दुस्साहसिक वारदात का अब तक खुलासा न होने से पुलिस की रात्रि गश्त और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोतवाली के बगल की कॉलोनी ही सुरक्षित नहीं है और पुलिस दो हफ्ते बाद भी चोरों को नहीं पकड़ पा रही है, तो बाकी क्षेत्रों की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।



