उत्तराखण्ड के आर्थिक रूपांतरण पर ग्राफ़िक एरा हल्द्वानी में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का हुआ सफल समापन

हल्द्वानी से संवाददाता गौरव गुप्ता की रिपोर्ट
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी परिसर में 8 और 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का सफलतापूर्वक समापन हुआ। “सतत अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन एवं समावेशी विकास हेतु युवा-नेतृत्व वाले नवाचार के माध्यम से उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का रूपांतरण” विषय पर आयोजित इस सेमिनार का मूल भाव “युवाओं को सशक्त बनाना, संसाधनों का सदुपयोग करना और सतत उत्तराखण्ड का निर्माण करना” रहा।
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट तथा पीडीपी विभाग द्वारा ‘आरोही’ संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और विद्यार्थियों ने राज्य के टिकाऊ विकास के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर गहन मंथन किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ग्राफ़िक एरा हल्द्वानी के परिसर निदेशक डॉ. एम. सी. लोहानी ने अपने स्वागत भाषण में आर्थिक प्रगति के साथ राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात सेमिनार की संयोजक प्रो. (डॉ.) बीना नारायण ने सेमिनार के उद्देश्यों और दो दिनों की रूपरेखा की विस्तृत जानकारी दी। इसी सत्र में शिक्षाविदों और शोधार्थियों के उत्कृष्ट विचारों से संकलित सेमिनार की स्मारिका (सोवेनियर) का विमोचन भी किया गया।
सत्र में मुख्य भाषण देते हुए उत्तराखण्ड सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राज शेखर जोशी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ सामाजिक अवसंरचना को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने ग्रामीण विकास, कौशल सुधार और इलेक्ट्रिक गतिशीलता (ई-मोबिलिटी) पर अपने अनुभव साझा किए। वहीं विशिष्ट अतिथि, उत्तराखण्ड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने राज्य में उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम को रेखांकित करते हुए स्थानीय युवाओं को अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने का आह्वान किया।
उद्घाटन सत्र के उपरांत ‘विज़न उत्तराखण्ड 2047’ के तहत राज्य में प्रति व्यक्ति आय की असमानता को दूर करने और सतत विकास के जरिए युवाओं के पलायन को रोकने के विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार जोशी के कुशल संचालन में आयोजित इस चर्चा में पर्यटन विभाग की अपर निदेशक श्रीमती पूनम चंद ने कम चर्चित पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रमों पर जोर दिया।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. पी. डी. पंत ने नदियों के संरक्षण के लिए स्थानीय संस्कृति व संसाधनों के उपयोग की बात कही, जबकि वाटरशेड प्रबंधन निदेशालय के डॉ. एस. के. उपाध्याय ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने पर बल दिया। आईसीएआर-आईवीआरआई के डॉ. शेर सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन तथा आरोही सोसाइटी के समिरन नारायण ने समावेशी एवं सुनियोजित पर्यटन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
यह सेमिनार हाइब्रिड मोड में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। ‘विज़न उत्तराखण्ड 2047’ के ढांचे के अनुरूप यह सेमिनार चार प्रमुख ट्रैक्स सतत अवसंरचना एवं जलवायु परिवर्तन, उद्यमिता एवं युवा सशक्तिकरण, विज़न उत्तराखण्ड 2047 एवं निरंतरता, तथा ऑनलाइन ट्रैक पर संचालित हुआ। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ-साथ ग्रीन इंजीनियरिंग, ऊर्जा सुरक्षा, इको-टूरिज्म और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया।
सेमिनार के दौरान आयोजित पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता में ग्राफ़िक एरा हल्द्वानी (बीएजेएमसी) की लक्ष्मी पंवार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि एमआईईटी के शैलेंद्र कांडपाल द्वितीय स्थान पर रहे। तृतीय स्थान संयुक्त रूप से एमआईईटी की वर्षा नैनवाल और जीईएचयू की शगुन जलहोत्रा को मिला, वहीं परिणीत वर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक डॉ. आनंद जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों और स्वयंसेवकों का आभार जताया।





