उत्तराखंड

भारत में जुडिशल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (SIT)के अभाव में बढ़ता अपराध ?ठगी के मुकदमे में गोपाल और विक्रम को 29 साल बाद मिला न्याय

भारत में जुडिशल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (SIT)के अभाव में बढ़ता अपराध ?ठगी के मुकदमे में गोपाल और विक्रम को 29 साल बाद मिला न्याय

मांग _भारत में ज्यूडिशियल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (SIT) का गठन के साथ धार्मिक स्थलों पर VIP दर्शन / स्नान पर अवैध वसूली पर प्रतिबंध लगाकर “एक देश – एक दर्शन नीति कानून 2026” लागू करो

रिपोर्टर गौरव गुप्ता 

बरेली से बड़ी खबर आज गरीब शक्ति दल के पदाधिकारी ने भारत में एक बड़ी मांग उठाते हुए जबरदस्त आंदोलन जिला का मुख्यालय पर किया संगठन प्रमुख मनोज विकट ने अपने पिछले 1 वर्ष से लगातार निम्न एक ज्वलंत मुद्दा भारत के सभी न्यायालयो में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (SIT) के गठन की मांग को दोहराते हुए कार्रवाई न होने से देश में अपराध चरम सीमा पर बढ़ने की बात कही उन्होंने कहा दुष्प्रभाव के कारण भारत में झूठे मुकदमों से अपराध बढ़ना और ज्यूडिशियल SIT की मांग पूरी न होना है जहां एक ओर आज भारत की जेलों में क्षमता से 130% अधिक कैदी हैं।

NCRB 2023 के अनुसार 75% विचाराधीन बंदी हैं। वहीं जेल में 1000-2000 कैदी होने से भोजन, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। वहीं संगठन का कथन है कि भारत के अपराध बढ़ने का मूल कारणों में थानों में FIR दर्ज करने की “पाठशाला” के चलते आपसी रंजिश, ईर्ष्या और बदले की भावना से झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोशो को भी अभियुक्त बनाकर जेल भेजा जाता है।

यह जेलों पर बोझ और अपराधी बनाने की फैक्ट्री संगठन करार देता है ऐसा रवैया संवैधानिक / कानूनी उल्लंघन के साथ साथ भारतीय संविधान अनुच्छेद 14, 19, 21( समानता, स्वतंत्रता और प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन) और अनुच्छेद 22 मनमाने ढंग से गिरफ्तारी पर संरक्षण और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 का घोर उल्लंघन है जबकि नियमावली आदर्श कारागार अधिनियम 2023 और सुप्रीम कोर्ट का आदेश – हुसैनआरा खातून बनाम बिहार राज्य और सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI (2022) जिसमें अनावश्यक गिरफ्तारी पर तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जगह BNSS 2023 की धारा 35(3) – पुलिस को कारण बताये बिना गिरफ्तारी से रोक। का प्रतिबंध लागू है इस प्रकार भारत में निर्दोष एवं सज्जन पुरुषों को भी अपराधी बनाने का खेल में पुलिस थानों की अहम भूमिका बनी हुई है

तथा संगठन झूठे दर्ज होने वाले मुकदमों को देखते हुए भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय,प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रीयों,जनरल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, भारत के उच्च न्यायालयो के जनरल रजिस्टरों से ऐतिहासिक पहल में मांग की है कि भारत में पुलिस से पृथक Judicial Investigation Bureau (SIT) का गठन किया जाए जिसमें सेवानिवृत्त जिला जज की अध्यक्षता में FIR की सत्यता की जांच 15 दिन में हो, उसके बाद ही न्यायालय में चार्जशीट पेश होने व्यवस्था हो संगठन ने अपराध बढ़ने का एक बड़ा उदाहरण पेश करते हुए क्रमिक मांग में संगठन ने अपराध बढ़ने के कारणों में एक बड़ा कारण देश के धार्मिक स्थलों पर VIP दर्शन/स्नान के नाम पर अवैध वसूली बड़े पैमाने पर होना बताते हुए इन धार्मिक स्थलों में वाराणसी घाट, काशी विश्वनाथ, प्रयागराज संगम, मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्याम, वैष्णो देवी, चार धाम, अजमेर शरीफ जैसे पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर 500 से 1000 रुपये और स्नान/वोटिंग के नाम पर 600 से 1000 रुपये प्रति व्यक्ति अवैध रूप से वसूले जा रहे हैं। जिस कारण गरीब-अमीर में भेदभाव, धक्का-मुक्की, झगड़े और अपराध बढ़ रहे हैं जिसका संगठन विरोध करता है तथा भविष्य में एक बड़े आंदोलन की चुनौती देता है।

संगठन का कथन है कि, संविधान भारत में संवैधानिक / कानूनी उल्लंघन संविधान अनुच्छेद 25 व 26 धर्म की स्वतंत्रता और धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता का हनन, धन के आधार पर भेदभाव।अनुच्छेद 15 धर्म, जाति के आधार पर भेदभाव पर रोक। लगता है तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 धारा 314 – आपराधिक न्यास भंग धारा 316(2)आपराधिक अतिचार / अवैध वसूली धारा 198, 202 – लोक सेवक द्वारा अवैध रूप से धन वसूलना ,उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 – धारा 2(47) अनुचित व्यापार व्यवहार तथा
धर्मस्व अधिनियम / काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 और चार धाम देवस्थानम बोर्ड कानून मंदिर प्रशासन को दर्शन शुल्क लेने का अधिकार नहीं है फिर भी कानून का घोर उल्लंघन भारत के धार्मिक स्थलों पर चल रहा है संगठन मांग करता है कि भारत में सभी श्रद्धालुओं को भारत के सभी धार्मिक स्थलों पर दर्शन एक समान हो जिसके लिए “एक देश – एक दर्शन नीति कानून 2026″तत्काल प्रभाव से लागू की जाए जिसके तहत सभी धार्मिक स्थलों पर सभी श्रद्धालुओं के लिए एक समान, निःशुल्क दर्शन और स्नान की व्यवस्था हो तथा VIP कल्चर तत्काल समाप्त हो। और अवैध वसूली करने वालों पर BNS की धारा 314 और 198 के तहत FIR दर्ज हो साथ ही सच्चाई घटना की रखने के लिये देश के सभी धार्मिक स्थलों पर रेट लिस्ट और CCTV अनिवार्य हो।

मांग पत्र सौंपने वालों में मनोज विकट (संगठन प्रमुख), गिरीश चंद सक्सेना,संजय सक्सेना एडवोकेट,संजीव सागर, गगनभान जैन ,चमेली देवी,रेनू जौहरी,उषा देवी आदि दर्जन लोगों उपस्थित रहे।

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