
कृषि कानूनों के वापस होने के बाद प्रदेश में किसानों को लेकर सियासत तेज हो गई है. 2022 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बीच अब किसानों को लेकर सियासत गर्माती नजर आ रही है. दरअसल, उत्तराखंड में 20 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जो किसान बाहुल्य हैं. इन सीटों पर दोनों राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं.
2022 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जहां भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपनी चुनावी तैयारी में जुटी हैं, वहीं कृषि कानून वापस होने के बाद प्रदेश में किसानों की सियासत तेज हो गई है. देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के हल्द्वानी के मैदानी क्षेत्र की सीटें किसान बाहुल्य हैं, जहां किसान निर्णायक भूमिका चुनाव में अदा कर सकते हैं.
ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही किसान बाहुल्य सीटों पर फोकस करने जा रहे हैं. आपको बता दें कि देहरादून में विकासनगर, सहसपुर, डोईवाला, हरिद्वार में भगवानपुर, लक्सर, झबरेड़ा, खानपुर, रुड़की, हरिद्वार ऊधमसिंह नगर में जसपुर, काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर, रुद्रपुर, सितारगंज, खटीमा, नानकमत्ता, हल्द्वानी, रामनगर जैसी सीटें किसान बाहुल्य हैं, जहां किसान निर्णायक भूमिका अदा कर सकते हैं.
भाजपा का कहना है कि किसान हमेशा से भाजपा के साथ में रहे हैं और ऐसे में इन सीटों पर भाजपा फोकस करने जा रही है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद सुयाल का कहना है कि पार्टी किसान बाहुल्य इलाके में खास फोकस करेगी. किसानों के साथ में हमेशा भाजपा खड़ी रही है. कांग्रेस पार्टी मुंगेरीलाल के सपने देख रही है.
दूसरी तरफ, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का दावा है कि जिस तरह से किसानों के साथ धोखा किया गया है… पहले कृषि कानून लाए, फिर किसानों और कांग्रेस पार्टी के दबाव में सरकार ने कानूनों को वापस लिया है. ऐसे में किसानों को पता है उनके साथ कौन है. भाजपा को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है और किसान बाहुल्य इलाकों में आखिर भाजपा क्या फोकस करेगी? किसानों के साथ जो नाइंसाफी हुई है, उसे किसान भूल नहीं सकता है. फिलहाल, किसानों को लेकर प्रदेश में जिस तरह से सियासत चल रही है, ऐसे में 2022 के विधानसभा चुनाव में ही पता चलेगा किसान बाहुल्य इलाकों में किस पार्टी को जीत मिली है.