सैलानी रजा चौक से शान-ओ-शौकत के साथ निकला जुलूस-ए-गौसिया

रिपोर्टर नाजिम अली
अंजुमन गौसो रज़ा (टीटीएस)
सैलानी बरेली
जुलूस-ए-गौसिया में या गौस की हुई सदाए बुलंद।
रंग-बिरंगी पोशाक में अंजुमनों ने की शिरकत।
बरेली,ग्यारहवी शरीफ के मौके पर बड़े पीर शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदादी गौस-ए-पाक की याद में आज सैलानी रज़ा चौक से जुलूस-ए-गौसिया पूरी शान-ओ- शौकत के साथ दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती व सज्जादानशीन व बानी-ए-जुलूस मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की क़यादत में निकाला गया।अंजुमन गौसो रज़ा (टीटीएस) के तत्वाधान में अंजुमने ने रंग-बिरंगे पोशाक में शिरकत की।
अंजुमन में शामिल लोग या गौस की सदाए बुलंद करते हुए चले। जुलूस आयोजक हाजी शारिक नूरी,अफजलुद्दीन,वामिक रज़ा आदि ने कायदे जुलूस मुफ़्ती अहसन मियां व अल्हाज मोहसिन हसन खान की दस्तारबंदी कर जोरदार इस्तक़बाल किया। मुफ़्ती अहसन मियां ने मुजाहिद राजको गौसिया परचम सौपकर जुलूस को रवाना किया। महफ़िल का आगाज़ मुफ्ती फुरकान रज़ा ने और दुआ हाफिज अज़हर रज़ा ने की।
इस मौके पर दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने गौस-ए-पाक की करामत बयान करते हुए कहा कि शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदादी ने हमें सीख दी कि मुसलमान हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए हक्कानियत पर कायम रहे। हम पर कितनी ही मुश्किल और दुश्वारी पेश आए लेकिन कभी सच और सब्र का दामन न छोड़ें।
अपने मज़हब पर सख्ती से कायम रहते हुए अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चले। मौजूदा दौर का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमेशा हालात एक जैसे नहीं रहते हालात और दौर बदलते रहते हैं। हर अंधेरी रात के बाद सूरज की किरणें दिन का उजाला लेकर आती है।
अल्लाह जल्द ही अंधेरा दूर कर रौशनी देगा। इस्लाम किसी पर न जुल्म करने की इजाज़त देता है और न जुल्म सहने की। जुलूस का संचालन हाजी शरिक नूरी ने किया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने आला हज़रत ये शेर पढ़ा “ये दिल ये जिगर ये आँखे ये सिर जहाँ चाहो रखों कदम गौसे आज़म। मौलाना अख़्तर हुसैन ने भी खिराज पेश किया।
सबसे आगे अंजुमन गुलामने ताजुशरिया चली। जुलूस अपने कदीमी रास्तों सैलानी रज़ा चौक,मुन्ना खान का नीम,साजन पैलेस,जगतपुर के रास्ते वापिस काकर टोला से होता हुआ दरगाह शाहदाना वली हाज़िरी देते हुए देर रात सैलानी रज़ा चौक पर खत्म हुआ। रास्तों में जगह जगह फूलों से जुलूस का इस्तक़बाल किया गया। सबील व लंगर भी तक़सीम किया गया।
नासिर कुरैशी ने बताया कि सुबह में जुलूस आयोजक हाजी शारिक नूरी के आवास पर महफ़िल सजाई गई। कुरानख्वानी के बाद नात-ओ-मनकबत का नज़राना पेश किया। इसके बाद तोशा शरीफ की फातिहा हुई।
जुलूस की व्यवस्था राशिद अली खान,अजमल नूरी,आज़म तहसीनी,परवेज़ नूरी,नासिर कुरैशी, तनवीर तहसीनी,शाहिद नूरी,शोएब रज़ा,औरंगजेब नूरी,ताहिर अल्वी,हाजी जावेद खान,अब्दुल माजिद अली,फिरोज खान,मंजूर रज़ा,इरशाद रज़ा,सय्यद माजिद,शान रज़ा,सय्यद एजाज़,युनुस गद्दी,नईम नूरी,साकिब रज़ा,साजिद रज़ा,नोमान खान, हस्सान रज़ा खान,शारिक बरकाती,इमरान खान,तारिक सईद, आलेनबी,इशरत नूरी,सैफ खान,अशमीर रज़ा,सबलू अल्वी,आरिफ नूरी,काशिफ रज़ा,मुस्तकीम नूरी,हाजी अज़हर बेग,जीशान चिश्ती,तनवीर रज़ा,शमी खान,अजमल खान,शाहनवाज रज़ा,अबु बकर,हाजी शकील रज़ा,नाज़िम रज़ा,इमरान साबरी,सुहैल रज़ा,शाद रज़ा,अरवाज़ रज़ा आदि ने व्यवस्था संभाली।






