भाटिया की उम्मीदवारी से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बडौली की जड़े हुई मजबूत

संजय भाटिया
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा। dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बेशक वह अब हरियाणा के मुख्यमंत्री नहीं है लेकिन प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक नीति निर्धारण में वह आज भी काफी निर्णायक हैं।
मनोहर लाल ने संजय भाटिया को राज्यसभा में भेजने की व्यवस्था करके एक साथ कई संदेश दिए हैं । सबसे बड़ा संदेश तो यह है कि आज भी हरियाणा में उनकी चलती है।
दूसरा यह की जो लोग यह कहा करते कि मनोहर लाल अब राजनीति के इतने कुशल खिलाड़ी हो गए हैं कि हरियाणा की राजनीति में किसी पंजाबी को प्रमोट नहीं करेंगे लेकिन संजय भाटिया को एक बार फिर संसद भेजने का फैसला करके उन्होंने आलोचकों को करारा जवाब और पंजाबियों को एक संदेश दे दिया है।
हरियाणा में यह महसूस किया गया है कि मनोहर लाल जब पहली बार मुख्यमंत्री बने तब वह जाति पाती के मामले में ज्यादा रुचि लेते नजर नहीं आते थे लेकिन अब वह पंजाबियत के मामले में थोड़ा ध्यान रखने लगे हैं। मामला चाहे प्रशासनिक समायोजन का हो चाहे राजनीतिक हिस्सेदारी का।
मनोहर लाल को अपने समर्थकों को राज्यसभा में समायोजित करने के मामले में एकाधिकार प्राप्त है। उन्होंने ही कार्तिकेय शर्मा को राज्यसभा भिजवाया, उनकी मेहरबानी से ही सुभाष बराला राज्यसभा के सांसद बने। उन्होंने ही रामचंद्र जांगड़ा को राज्यसभा भेजा उनकी मेहरबानी से ही किरण चौधरी का राज्यसभा में जाने का सपना 20 साल बाद पूरा हो पाया था । उनकी मर्जी से ही रेखा शर्मा आज राज्यसभा की सांसद हैं और अब संजय भाटिया को राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामजद किया जा रहा है।
मोहनलाल बडौली की जड़े हुई मजबूत।
सब जानते हैं कि संजय भाटिया को भी अब फिर मनोहर प्रसाद प्राप्त हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने के मामले में उन्होंने केवल अकेले कार्तिकेय शर्मा की मदद नहीं की बल्कि इसी तरह से उन्होंने सुभाष चंद्रा को भी राज्यसभा भिजवाने का काम करके दिखाया था।
यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है कि संजय भाटिया को राज्यसभा भेजने का अर्थ यह भी है कि अब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मोहनलाल बडोली को कोई आंच आने वाली नहीं है।
वह अब कम से कम डेट वर्ष तक भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष के रूप में काम करते नजर आने वाले हैं। यहां महत्वपूर्ण विषय यह भी है कि मनोहर लाल कथित तौर पर संजय भाटिया को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने की योजना पर काम कर रहे थे । यदि यह योजना सिरे चढ़ती तो उनका एक तरह से पूरे हरियाणा में प्रभाव और हस्तक्षेप बढ़ जाता लेकिन जब उन्हें इसमें सफलता मिलती नजर नहीं आई तो फिर भाटिया को राज्यसभा भेजने का मौका चूक जाना किसी तरह से भी उचित नहीं था।
जाहिर है कि इस समायोजन से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि उनकी प्राथमिकता है कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बडोली ही काम करते रहें। प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार के रूप में कोई व्यक्ति 6 साल के लिए दिल्ली चला जाए तो इसे घाटे का सौदा नहीं कहा जा सकेगा। सब जानते हैं कि मोहनलाल बडौली को समर्थन के मामले में मुख्यमंत्री अकेले नहीं है केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी उनके साथ हैं। मनोहर लाल ने इन परिस्थितियों को समझा और समय अनुकूल फैसला लेते हुए संजय भाटिया का नाम आगे कर दिया। अब बेशक किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, ओमप्रकाश धनखड़, कैप्टन अभिमन्यु, डॉक्टर बनवारी लाल और पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल अपने हित न साध पाएं हो।




