उत्तराखंड

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों पर स्थापित होंगी 110 फीट ऊंची शिव प्रतिमाएं! ‘राष्ट्रीय सनातन धाम योजना’ लागू करने की मांग

सनातन संस्कृति संरक्षण हेतु ‘राष्ट्रीय सनातन धाम – 110 फीट प्रतिमा पर्यटन योजना’ लागू करने की मांग, बरेली के रामगंगा घाट के सौंदर्यीकरण का भी रखा प्रस्ताव

रिपोर्टर गौरव गुप्ता

रिपोर्टर गौरव गुप्ता – बरेली/वाराणसी : सनातन संस्कृति के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से संगठन प्रमुख मनोज विकट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक मांग पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों, चार धामों और सप्तपुरी सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर वहां के मुख्य आराध्य देव की 110 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गई है।

​मूल रूप से वाराणसी (आदमपुर, पीलीकोठी) के निवासी और वर्तमान में बरेली में रह रहे मनोज विकट ने जनहित में इस प्रस्ताव को “राष्ट्रीय सनातन धाम – 110 फीट प्रतिमा पर्यटन योजना” के रूप में स्वीकृत करने की अपील की है।

​12 ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धामों का जिक्र
पत्र में मांग की गई है कि काशी विश्वनाथ (वाराणसी), महाकालेश्वर (उज्जैन), सोमनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम, मल्लिकार्जुन, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव की 110 फीट ऊँची प्रतिमा लगाई जाए। इसके अलावा अयोध्या में श्री राम दरबार, मथुरा-वृंदावन व बरसाना में राधा-कृष्ण, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम व महर्षि भारद्वाज, हरिद्वार में माँ गंगा, बद्रीनाथ में भगवान विष्णु, द्वारका में श्री कृष्ण, कांचीपुरम में माँ कामाक्षी, तिरुपति बालाजी, वैष्णो देवी और कामाख्या धाम में भी आराध्य देवों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएं।

​बरेली और वाराणसी के लिए विशेष मांग
मांग पत्र में वाराणसी और बरेली के लिए विशेष प्रस्ताव रखा गया है। इसमें वाराणसी के काशी विश्वनाथ घाट के पास 110 फीट की शिव प्रतिमा लगाने और बरेली में रामगंगा नदी के रामघाट/चौबारी घाट पर रामायण कालीन संतों—महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, परशुराम व श्रृंगी ऋषि के नाम पर घाटों का निर्माण कराने तथा भव्य ‘राम दरबार’ (राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान) की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गई है। साथ ही नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम के जीर्णोद्धार का भी मुद्दा उठाया गया है।

​संवैधानिक दायरे में है मांग
मनोज विकट और उनके सहयोगी अधिवक्ता संजय सक्सेना ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह मांग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28, 49 और 51A(f) के अंतर्गत पूरी तरह संवैधानिक है। यह किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यटन और राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण का प्रयास है, जो अनुच्छेद 27 का उल्लंघन नहीं करता

​संगठन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से प्रार्थना की है कि इसे राष्ट्रीय योजना के रूप में मंजूरी देकर केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। इस मांग पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा बरेली व वाराणसी के जिलाधिकारियों को भी भेजी गई है।

​इस मुहिम में मनोज विकट के साथ गिरीश चंद्र सक्सेना, संजय सक्सेना (एडवोकेट), गगनभान जैन और चमेली देवी मुख्य रूप से सहयोगी रहे।
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​ब्रेकिंग न्यूज़: बरेली/वाराणसी
​देश के 12 ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धामों पर 110 फीट की भव्य प्रतिमा लगाने की मांग, पीएम-सीएम को भेजा पत्र
​सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संगठन प्रमुख मनोज विकट ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर “राष्ट्रीय सनातन धाम – 110 फीट प्रतिमा पर्यटन योजना” शुरू करने की मांग की है।

​प्रमुख मांगें:
​12 ज्योतिर्लिंग: काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ व सोमनाथ सहित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों पर लगे 110 फीट ऊँची शिव प्रतिमा।
​प्रमुख तीर्थ: अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज, हरिद्वार, बद्रीनाथ, तिरुपति, वैष्णो देवी व कामाख्या धाम में मुख्य आराध्य देवों की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना।
​बरेली विशेष: रामगंगा चौबारी घाट पर महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, परशुराम व श्रृंगी ऋषि के नाम पर घाट निर्माण और भव्य ‘राम दरबार’ की स्थापना।
​जीर्णोद्धार: नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम का विकास।

​मनोज विकट और उनके सहयोगियों (गिरीश चंद्र सक्सेना, संजय सक्सेना एडवोकेट, गगनभान जैन व चमेली देवी) ने इसे संविधान के तहत राष्ट्रीय धरोहर और पर्यटन के संरक्षण हेतु एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। पत्र की प्रतिलिपि पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय सहित बरेली और वाराणसी के डीएम को भी भेजी गई है

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