उत्तराखंड

लालकुआं में प्रदूषण पर फूटा गुस्सा! ‘जहरीली हवा’ से परेशान लोगों ने केंद्र सरकार और एनजीटी से लगाई गुहार!

लालकुआं में प्रदूषण पर फूटा गुस्सा! ‘जहरीली हवा’ से परेशान लोगों ने केंद्र सरकार और एनजीटी से लगाई गुहार!

पेपर मिल पर वायु-जल प्रदूषण फैलाने का आरोप, कार्रवाई न होने पर कानूनी लड़ाई की चेतावनी

रिपोर्टर गौरव गुप्ता। लालकुआं

औद्योगिक नगरी लालकुआं में बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। क्षेत्र में फैली तीखी दुर्गंध, धुएं और प्रदूषित पानी से परेशान नागरिकों की ओर से समाजसेवियों ने सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के खिलाफ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को शिकायत भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ भट्ट और हर्ष सिंह बिष्ट ने तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से विस्तृत शिकायत पत्र भेजा। शिकायत रजिस्ट्री और स्पीड पोस्ट से भी प्रेषित की गई है।

10–15 किमी तक फैल रही दुर्गंध।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेपर मिल से निकलने वाली दुर्गंध और धुआं 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र तक फैल रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में खड़ा रहना तक मुश्किल हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी बीमारियां, दमा, एलर्जी, आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं।

खेतों तक पहुंच रहा जहरीला पानी।

शिकायत में कहा गया है कि मिल से निकलने वाला अपशिष्ट जल नालों के जरिए खेतों में पहुंच रहा है, जिससे कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। कई किसानों ने फसल खराब होने और मिट्टी की उर्वरता घटने की शिकायत की है। दुकानों में रखे खाद्य पदार्थों तक पर दुर्गंध का असर पड़ने की बात कही गई है, जबकि पशुओं के बीमार होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

पहले भी उठ चुका मामला

समाजसेवियों के अनुसार 18 फरवरी को आयोजित जिलाधिकारी जनता दरबार में भी यह मुद्दा उठाया गया था। जिलाधिकारी ने पर्यावरण विभाग, उपजिलाधिकारी हल्द्वानी और मिल प्रबंधन को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का आरोप

शिकायत पत्र में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986, जल अधिनियम-1974 और वायु अधिनियम-1981 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। साथ ही कहा गया है कि प्रदूषण के कारण नागरिकों के स्वच्छ वातावरण में जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है।

प्रमुख मांगें।

स्वतंत्र एजेंसी से प्रदूषण की जांच

पुराने जल व वायु नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों की जांच

दोषी पाए जाने पर मिल प्रबंधन पर कार्रवाई व जुर्माना

प्रभावित लोगों को मुआवजा व चिकित्सा सुविधा

समाजसेवियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण और उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

फिलहाल लालकुआं की जनता प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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