उत्तराखंड

लालकुआँ सेंचुरी पेपर मिल के दूषित नाले में मगरमच्छों का आतंक, दहशत में दर्जनों गाँव के ग्रामीण

लालकुआँ सेंचुरी पेपर मिल के दूषित नाले में मगरमच्छों का आतंक, दहशत में दर्जनों गाँव के ग्रामीण, ग्रामीणों ने की निजात की मांग।

रिपोर्टर गौरव गुप्ता। लालकुआँ

लालकुआँ स्थित सेंचुरी पेपर मिल से निकलने वाले दूषित नाले ने स्थानीय ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। इस नाले में मगरमच्छों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। आलम यह है कि ये विशालकाय मगरमच्छ अब पानी से निकलकर लोगों के घरों की दहलीज तक पहुँचने लगे हैं, जिससे जान-माल का खतरा पैदा हो गया है।

यह समस्या केवल एक गाँव तक सीमित नहीं है। बिंदुखत्ता के घोडनाला, राजीवनगर, पटेल नगर, मुल्तानगर, बाजपुर चौराहा, सुभाष नगर, पश्चिम राजीवनगर, शास्त्री नगर, सत्रह एकड़, गांधीनगर, हल्दूधार, जवाहर नगर और शान्तिपूरी से लेकर किच्छा तक, जहाँ-जहाँ से यह नाला गुजरता है, वहाँ दहशत का पहरा है।

इसी को लेकर शहर के पत्रकारों की टीम ने जब इन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, तो स्थिति बेहद गंभीर पाई गई। ग्रामीणों के अनुसार:

नाले में दर्जनों छोटे-बड़े मगरमच्छ मौजूद हैं।

मगरमच्छ अक्सर धूप सेंकने के लिए नाले से बाहर निकलकर खेतों और सड़कों पर आ जाते हैं।

बरसात के दिनों में जब सड़कों पर पानी भरता है, तो डर के मारे लोग बच्चों को स्कूल तक नहीं भेजते।

रात के समय ग्रामीणों ने डर के कारण घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है।

हमले की कोशिश और वन विभाग की कार्रवाई

स्थानीय लोगों ने एक खौफनाक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में एक मगरमच्छ ने एक महिला पर हमले की नीयत से पीछा किया, जिसने भागकर मुश्किल से अपनी जान बचाई। हालांकि वन विभाग ने पूर्व में कुछ मगरमच्छों का रेस्क्यू किया है, लेकिन नाले में मगरमच्छों के प्रजनन के कारण उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

ग्रामीणों की माँग

क्षेत्र में बच्चों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर लोग खासे चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सेंचुरी पेपर मिल के इस खुले और दूषित नाले के कारण उनका जीवन नरक बन गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और मिल प्रबंधन से पुरजोर माँग की है कि इस दूषित नाले को तत्काल भूमिगत (Underground) किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।

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