सेंचुरी का जहरीला नाला बना मौत का जाल: सेंचुरी पेपर मिल के खिलाफ लालकुआँ में महापंचायत

सेंचुरी का जहरीला नाला बना मौत का जाल: सेंचुरी पेपर मिल के खिलाफ लालकुआँ में महापंचायत, उग्र आंदोलन की चेतावनी।
रिपोर्टर गौरव गुप्ता। लालकुआँ
लालकुआँ।सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के जहरीले प्रदूषण और अनियमितताओं के खिलाफ उत्तराखण्ड बेरोजगार संगठन ने आज लालकुआँ में महापंचायत कर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने हाट बाजार में एकत्र होकर मिल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और फिर तहसील पहुंचकर तहसीलदार पूजा शर्मा के माध्यम से उप जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा।
वही दिये गए ज्ञापन में वर्ष 2006 में जिला प्रशासन द्वारा सेंचुरी पेपर मिल प्रबंधन को दिए गए आदेशों का पालन करवाने, जहरीले नाले को भूमिगत करने तथा उसमें पल रहे विशालकाय मगरमच्छों के आतंक से क्षेत्रवासियों को सुरक्षा दिलाने की मांग की गई है। साथ ही प्रदूषण से प्रभावित स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की भी मांग उठाई गई।
बताते चले कि यहाँ उत्तराखण्ड बेरोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखण्डी के नेतृत्व में हुई महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि सेंचुरी पेपर मिल द्वारा छोड़े गए जहरीले नाले में अब हर आकार के मगरमच्छ पनप चुके हैं, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, घास लाने वाली महिलाओं और राहगीरों की जान-माल को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यह नाला गांव के बीचों-बीच रिहायशी इलाकों से होकर बह रहा है, जिससे जल प्रदूषण के साथ-साथ जमीन के भीतर कई सौ फीट तक का पानी भी जहरीला हो चुका है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दूषित पानी पीने और वायु प्रदूषण के कारण क्षेत्र में कैंसर, दमा, खसरा, पीलिया, पथरी जैसी घातक बीमारियां फैल रही हैं और कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद मिल प्रबंधन आंखें मूंदे बैठा है।
रोजगार के मुद्दे पर भी मिल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए। संगठन ने कहा कि प्रदूषण का दंश स्थानीय लोग झेल रहे हैं, लेकिन रोजगार के नाम पर बरेली और मुरादाबाद के लोगों की पिछले दरवाजे से भर्ती की जा रही है, जबकि प्रभावित क्षेत्र के युवाओं की अनदेखी हो रही है।
महापंचायत के बाद तहसील पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही जहरीले नाले को भूमिगत कर प्रदूषण और मगरमच्छों के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई, तो स्थानीय लोगों के साथ मिलकर “नाला रोको, जीवन बचाओ” के तहत उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि सेंचुरी पेपर मिल की इन अनियमितताओं को लेकर जनता का गुस्सा अब सड़क पर उतर चुका है और यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।







