उत्तराखंड

जंगल में भटकी नाबालिग बच्ची को लालकुआँ पुलिस ने सुरक्षित परिजनों से मिलाया

रिपोर्टर-गौरव गुप्ता।

लालकुआँ कोतवाली क्षेत्र के अन्तर्गत अम्बेडकर नगर वार्ड नम्बर एक के समीप जंगल में एक नाबालिग मासूम बच्ची के भटक जाने का मामला सामने आया।

देर शाम समाजसेवी मुकेश कुमार ने लालकुआँ कोतवाल बृजमोहन राणा को सूचना दी कि अम्बेडकर नगर वार्ड नम्बर एक स्थित देवी मंदिर के पास जगंल की और एक मासूम बच्ची जा रही थी जिसकी उम्र लगभग 9 बर्ष की होगी। जिसे स्थानीय लोगों ने जंगल से लाकर देवी मंदिर पर बिठा रखा है तथा वह अपना नाम-पता तथा माता पिता का नाम बताने में असमर्थ है।

सूचना मिलते ही लालकुआँ कोतवाली पुलिस के हेड कांस्टेबल जितेंद्र बिष्ट और संदीप राय मौके पर पहुंचे और मासूम को सुरक्षित कोतवाली ले गये।

पुलिस द्वारा मासूम बच्ची से कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी मानसिक स्थिति सही न होने के कारण वह कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकीं। इसके बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ शुरू की और लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार मासूम बच्ची की पहचान कर ली गई। मासूम बच्ची का नाम लक्ष्मी है उसके पिता का नाम शत्रुघ्न है जो कि बंजरी कम्पनी की रहने वाली हैं।

जांच में पता चला कि लक्ष्मी अपने घर के पास घूम रही थी मानसिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह सड़क सड़क घर से निकल गईं और भटकते हुए जंगल की तरफ पहुंच गईं।

कुछ मिनटों की मशक्कत के बाद लक्ष्मी के पिता शत्रुघ्न कोतवाली पहुंचे। जब उन्होंने अपनी बेटी को सुरक्षित देखा तो वे बेहद भावुक हो गए। उन्होंने लालकुआँ पुलिस की तत्परता, सतर्कता और संवेदनशीलता की खुले दिल से सराहना की और पुलिस का आभार व्यक्त किया।

वही लालकुआँ पुलिस की मुस्तैदी और इंसानियत के चलते नाबालिग लड़की को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया जा सका। क्षेत्रवासियों ने भी पुलिस की इस तत्परता की सराहना की है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित किया कि पुलिस न सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने में बल्कि मानवीय संवेदनाओं के प्रति भी पूरी तरह सजग रहती है।

इधर समाजसेवी मुकेश कुमार ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसके परिजन विशेष ध्यान रखें ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

लालकुआँ पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि इस तरह की कोई घटना दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके। स्थानीय लोगों की सहरानीय की है।

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