
देहरादूनः उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उत्तराखंड की राजनीति का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है और तोड़-मरोड़ की राजनीति में राजनेता भी थाल के बैगन बनकर रह गए। कभी इस नाव में सवार होते हैं तो कभी उस नाव में।
ऐसे राजनेताओं को सत्ता का लालच या फिर किसी बात का डर, दलबदलू नेता सत्ता में काबिज होकर सत्ता की मौज लेते हुए दिखाई दे रहा है। केंद्रीय नेताओं का चुनावी दलों के साथ जुबानी हमलों का भी सिलसिला शुरू हो चुका है। लेकिन हरक सिंह रावत अभी भारतीय जनता पार्टी में अपनी कार्य प्रणाली को लेकर संदेह के घेरे में बने हुए हैं। इस बार हरक सिंह का हरीश रावत को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर चर्चाओं में है।
देहरादून में आकर अमित शाह ने हरीश रावत के खिलाफ कई आरोप लगाए। कुछ ऐसी बातें भी कह दी, जो आने वाले चुनाव में राजनीतिक रूप से सुनाई देती रहेंगी। लेकिन इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच नई खबर हरक सिंह रावत को लेकर है।
दरअसल अमित शाह ने जहां एक तरफ हरीश रावत के खिलाफ जोरदार हमला किया था तो वहीं हरक सिंह रावत हरीश रावत को लेकर पिछले कुछ समय से काफी नरम दिखाई दे रहे हैं। स्थिति यह है कि अमित शाह की तरफ से दिए गए बयान पर वह हरीश रावत को कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हरक सिंह रावत का इस तरह हरीश रावत के खिलाफ बयानबाजी देने से किनारा करना राजनीतिक रूप से कई चर्चाएं बटोर रहा है।
दूसरी तरफ हरक सिंह रावत का हरीश रावत को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर अपनाना वाकई भाजपा को अखर रहा है। यही नहीं हरीश रावत का इस तरह का रवैया कांग्रेस के लिए भी चौंकाने वाला है। हरक सिंह रावत को लेकर लगातार चर्चा है कि वह कांग्रेस के संपर्क में हैं और कभी भी भाजपा के पाले से कांग्रेस में कूद सकते हैं।
हालांकि, हरक सिंह रावत इस बात का खंडन करते रहे हैं। लेकिन उनका हरीश रावत को लेकर नया रूप दलबदल को लेकर संभावनाओं में चर्चाओं को बढ़ा रहा है। कांग्रेस की माने तो हरक सिंह रावत लगातार भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने की कोशिश में जुटे हुए हैं और इसीलिए वह इस तरह के बयान से बच रहे हैं: सूत्र
वहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर इशारों ही इशारों में बड़ी बात कही है। सियासी हलकों में इसके तमाम निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। यशपाल आर्य की पार्टी में वापसी का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे राज्य हित में बताया है। इसके साथ ही कुछ बागियों का जिक्र करते हुए उन्हें धामी मंत्रिमंडल की शोभा बताया है।
वहीं मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना का शुभारंभ यूं तो सहकारिता विभाग का कार्यक्रम था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस सहित पूर्व सीएम हरीश रावत का जिक्र कर इसे पूरी तरह से सियासी रंग में रंग दिया। उनके निशाने पर कांग्रेस से ज्यादा पूर्व सीएम हरीश थे। उन्होंने रावत पर एक के बाद एक लगातार कई हमले किए। अब शाह के इन हमलों के सियासी मायने टटोल जा रहे हैं।
राज्य की राजनीति अब तक दो प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है। जो एक के बाद एक सत्ता पर काबिज होती आई हैं। अगर मिथक नहीं टूटा तो इस बार सत्ता का सुख भोगने की बारी कांग्रेस की है। ऐसे में शाह का कांग्रेस पर हमला बोलना राजनीतिक लिहाज से किसी को अंचभित नहीं करता। लेकिन जब शाह के निशाने पर कांग्रेस पार्टी से इतर पूर्व सीएम हरीश रावत आ गए तो इसके अलग सियासी निहितार्थ निकाले जाने लगे। कहा जा रहा है, वर्तमान में जिस तरह से पूर्व सीएम रावत ने वापसी की है, उसे भाजपा ज्यादा सचेत हो गई है।
अपनी एक फेसबुक पोस्ट में पूर्व सीएम हरीश रावत ने लिखा है कि भाजपा में गए कुछ ‘बल्द’ भी अच्छे मंत्री और अच्छे प्रशासक हैं। यदि वह धामी मंत्रिमंडल में न रहे तो मंत्रिमंडल आभाविहीन हो जाएगा।