उत्तराखंड

गौला नदी द्वारा किए जा रहे भू- कटाव एवं क्षतिग्रस्त तटबंधों से हो रहे नुकसान को लेकर काग्रेंस का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

रिपोर्टर गौरव गुप्ता। लालकुआँ

लालकुआँ हर बर्ष मानसून सीजन में गौला नदी द्वारा किए जा रहे भू-कटाव एवं क्षतिग्रस्त तटबंधों से हो रहे किसानों को भारी नुकसान के खिलाफ आज महिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व मे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिन्दुखत्ता स्थित तीन मदिंर के समीप गौला नदी किनारे जोरदार प्रदर्शन किया।जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उप जिला अधिकारी कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम भेजा। जिसमें कार्यकर्ताओं ने तत्काल कार्यवाही की मांग की।

यहाँ महिला काग्रेंस की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जया कर्नाटक के नेतृत्व में बिन्दुखत्ता स्थित 3 मदिंर के समीप गौला किनारे एकत्रित हुए सैकड़ों काग्रेंस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस मौके पर काग्रेंस वक्ताओं ने कहा कि हर साल बरसात में गौला नदी उफान पर आती है, जिससे नदी किनारे बसे ग्रामीणों को भू-कटाव के चलते नुकसान झेलना पड़ता है।पूर्व में भी कई लोगों की भूमि और घर नदी में समा चुके हैं लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान सरकार और प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में बाढ़ सुरक्षा के लिए बनाए गए तटबंध और चैकडैम एक बरसात भी नहीं झेल पाये, सभी तटबंध क्षतिग्रस्त होकर नदी के पानी में बह गए।वही हर साल शासन प्रशासन द्वारा करोड़ों रूपये इनके निर्माणों में लगाया जाता है।उसके बाबजूद भी किसानों की कई एकड़ कृषि भूमि गौला नदी की भेंट चढ़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर से लेकर श्रीलंका टापू तक के तटवर्ती इलाकों में तटबंध बनाकर गोला के तटवर्ती क्षेत्र में होने वाले भूकटाव को रोका जाए‌।

उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कई बार तटवर्ती क्षेत्र में तटबंध बनाए जाने की मांग की जा चुकी है लेकिन उस पर ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई है इससे क्षेत्रवासियों आक्रोश के साथ-साथ भय का माहौल भी है क्योंकि काश्तकारों के पास आजीविका का एक मात्र साधन उनकी कृषि भूमि है जिसको लेकर के वर्षा काल में उनकी चिंताएं बढ़ जाती हैं। ज्ञापन में धन के दुरुपयोग को रोके जाने की भी मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही इस और ध्यान नही दिया गया तो काग्रेंस उग्र आंदोलन को बध्य होगी। जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

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