Chandigarh

महान गणितज्ञ रामानुजन की विरासत पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आज से

देश-विदेश के दिग्गज करेंगे गहन मंथन

दक्ष दर्पण 

गुरुग्राम। श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राई सेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) में 7–8 मार्च को “रामानुजन की विरासत: भविष्य की पीढ़ियों के लिए गणित व उससे आगे तक की प्रेरणा” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। एसजीटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा के नेतृत्व में यह सम्मेलन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) के सहयोग से आयोजित हो रहा है।

सम्मेलन का आयोजन मुख्य संरक्षक एवं एसजीटीयू के कुलाधिपति पद्मश्री व पद्म भूषण राम बहादुर राय के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जबकि अध्यक्षता पंकज मित्तल (सेक्रेटरी जनरल, एआईयू) द्वारा होगी। इसका संयोजन वरिष्ठ गणित शिक्षिका और एनसीईआरटी की जनरल काउंसिल की सदस्य अनिता शर्मा करेंगी। सम्मेलन में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की गणितीय विरासत और उसके आधुनिक शोध, नवाचार तथा शिक्षा पर प्रभाव पर गहन चर्चा होगी।

कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधकर्ता संख्या सिद्धांत, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत गणितीय मॉडलिंग जैसे विषयों पर विचार साझा करेंगे। साथ ही रामानुजन की सोच और समस्या समाधान पद्धति को आधुनिक शिक्षण में शामिल करने के लिए रामानुजन मैथेमेटिक्स करिकुलम विकसित करने पर भी चर्चा होगी।

अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस

में प्रो. दिनेश सिंह (पूर्व कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. जॉर्ज ई. एंड्रयूज़ (पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय), डॉ. ब्रूस बर्न्ट (इलिनॉय विश्वविद्यालय), डॉ. वेदवीर आर्य (डीआरडीओ), प्रो. श्रीराम चौथाईवाले (राष्ट्रीय संयोजक, वैदिक गणित, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली), डॉ. सत्यनारायण रेड्डी (शिव नादर विश्वविद्यालय), डॉ. गौरव भटनागर (अशोका विश्वविद्यालय), डॉ. स्वामीनाथन (आईआईटी रुड़की), डॉ. अनिंद्य सिन्हा (आईआईएसईआर पुणे), डॉ. आशीष अरोड़ा (पीटीसी विश्वविद्यालय), डॉ. गजेंद्र सिंह (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), डॉ. जगदीश बंसल एवं डॉ. कपिल शर्मा (दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय), डॉ. कृष्णन (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), डॉ. राकेश भाटिया तथा डॉ. अनुराधा गुप्ता शामिल होंगे।

वैदिक गणित पर विशेष सत्र भी आयोजित होंगे।

अब तक 40 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुतियों के लिए स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 10 आमंत्रित व्याख्यान और एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा भी आयोजित की जाएगी।

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