देहरादून की नमिता ने पेश की मिसाल, दो साल से बिना वेतन सैकड़ों बेटियों का भविष्य संवार रहीं नमिता ममगाई

देहरादून की नमिता ने पेश की मिसाल
बिना वेतन लिए महिला आईटीआई में संवार रही हैं सैकड़ों बेटियों का भविष्य
दूसरे राज्यों में निधि बांटने वालों ने नए कमरे बनवाने को धन देने से किया इनकार
देहरादून। शिक्षक दिवस के अवसर पर जहाँ देशभर में गुरुओं का समान किया जाता है, वहीं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसी प्रेरक खबर सामने आई है जिसने ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा की परिभाषा को और गहरा कर दिया है। शिक्षाविद नमिता ममगाई पिछले दो वर्षों से बिना एक भी रुपया वेतन लिए एक डूबते हुए महिला पॉलिटेक्निक संस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।
बंद होने की कगार पर था संस्थान, अब 300 छात्राएं ले रही हैं शिक्षा
नमिता ममगाई ने देहरादून के ‘बी.एस. नेगी महिला प्राविधिक प्रशिक्षण संस्थान’ (B.S. Negi Women’s Polytechnic) की जिम्मेदारी उस वक्त संभाली जब वह लगभग बंद होने वाला था। उस समय संस्थान में केवल 50 छात्राएं बची थीं और फंड की भारी कमी थी। संस्थान को बचाने के लिए नमिता ने न केवल अपनी मेहनत झोंक दी, बल्कि यह फैसला भी किया कि वे तब तक वेतन नहीं लेंगी जब तक संस्थान आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो जाता। आज उनके प्रयासों से यहाँ 300 से अधिक छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
बेटियों को बना रही हैं ‘स्किल’ के जरिए आत्मनिर्भर
संस्थान का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पहाड़ी क्षेत्रों की लड़कियों को हुनरमंद बनाना है। यहाँ फैशन डिजाइन, इंटीरियर डिजाइन, गारमेंट टेक्नोलॉजी और टेक्सटाइल डिजाइन जैसे प्रोफेशनल कोर्स कराए जाते हैं।
नमिता मैम का कहना है कि सिर्फ डिग्री देने से बेहतर है कि बेटियों को ‘स्किल’ दी जाए ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें।
संस्थान की कई छात्राएं आज मॉडलिंग, बुटीक और फैशन की दुनिया में नाम कमा रही हैं। हाल ही में यहाँ की छात्रा कृतिका सेवाल ने ‘मिस रुद्रप्रयाग‘ का खिताब जीतकर संस्थान का मान बढ़ाया है।
सामाजिक सहयोग और ‘गुरु’ की भावना
इस सफर में नमिता को हंस फाउंडेशन की मंगला माता जी और डिक्सन टेक्नोलॉजी जैसे संस्थानों का साथ मिला है, जो छात्राओं की स्कॉलरशिप का खर्च उठाते हैं। नमिता के पति जे.बी. ममगाई और उनकी दोनों बेटियां भी इस नेक काम में उनकी मदद कर रहे हैं। वे खुद भी 8 लड़कियों की पढ़ाई का खर्च निजी तौर पर उठा रही हैं।
भावी लक्ष्य: उत्तराखंड का सर्वश्रेष्ठ संस्थान बनाने का सपना
नमिता ममगाई का सपना है कि अगले दो वर्षों में वह इसे उत्तराखंड का सबसे बेहतरीन स्किल-बेस्ड संस्थान बनाएंगी। उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि अगर तकनीकी शिक्षा विभाग और ONGC का थोड़ा और सहयोग मिले, तो उत्तराखंड की हजारों और बेटियों का भविष्य संवारा जा सकता है।
नमिता कहती हैं, “एक कन्या जब शिक्षित और आत्मनिर्भर होती है, तो वह केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश का भविष्य बनाती है।”



