उत्तराखंड

चारधाम यात्रा ने रचा नया इतिहास, देवभूमि बनी आस्था और विकास की मिसाल

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा भारतीय आस्था की वह अविरल धारा है, जो युगों से हिमालय की गोद में बहती आई है श्रीनिवास पोस्ती

रिपोर्टर हरीश चन्द्र, ऊखीमठ

श्रीनिवास पोस्ती सदस्य बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति उत्तराखंड की चारधाम यात्रा भारतीय आस्था की वह अविरल धारा है, जो युगों से हिमालय की गोद में बहती आई है।

यह केवल मंदिरों तक पहुँचने की यात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, साधना और आत्मिक शुद्धि का पथ है। बीते वर्षों में इस पवित्र परंपरा ने जिस प्रकार नया आयाम प्राप्त किया है, उसने देवभूमि उत्तराखंड को आस्था के साथ-साथ विकास और सुशासन का जीवंत उदाहरण बना दिया है।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चारों धामों—यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और विशेष रूप से केदारनाथ—में श्रद्धालुओं की संख्या ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। 2013 की आपदा के बाद जिस केदारनाथ के पुनर्जीवन को लेकर संशय था, आज वही धाम पुनर्निर्माण, सुव्यवस्था और आध्यात्मिक गरिमा का सशक्त प्रतीक बन चुका है।

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के भव्य परिसर, सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालु-अनुकूल सुविधाएँ इस परिवर्तन की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करती हैं।

इस व्यापक परिवर्तन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रिय और संवेदनशील भूमिका उल्लेखनीय रही है। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप उन्होंने यात्रा व्यवस्थाओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को तत्परता से कार्यरत रखा। सड़क, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और यातायात नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने यात्रा को भरोसेमंद बनाया है।

इसी क्रम में केदारनाथ–बद्रीनाथ मंदिर समिति की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी जी के कुशल, संतुलित और श्रद्धालु-केन्द्रित प्रशासन ने मंदिर परिसरों की व्यवस्था को नई दिशा दी है। दर्शन प्रणाली का सुव्यवस्थित संचालन, स्वच्छता, सुरक्षा, मंदिर मर्यादाओं का संरक्षण और सेवाओं की पारदर्शिता—इन सभी क्षेत्रों में समिति की कार्यशैली सराहनीय रही है। परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के संतुलन ने श्रद्धालुओं को न केवल सुविधा दी, बल्कि आस्था की गरिमा को भी अक्षुण्ण रखा है।

चारधाम यात्रा का यह नवस्वरूप स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए भी वरदान सिद्ध हुआ है। होटल, होम-स्टे, ढाबे, टैक्सी सेवाएँ, घोड़ा-खच्चर व्यवसाय, स्थानीय दुकानदार, हस्तशिल्प और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हजारों परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्षों से पलायन की पीड़ा झेल रहे पहाड़ी क्षेत्रों में अब रोजगार और आत्मसम्मान की नई किरण दिखाई देने लगी है। महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने सामाजिक-आर्थिक संरचना को और सशक्त किया है।

आज चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की मज़बूत धुरी बन चुकी है। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक आत्मविश्वास का आधार बन गई है।

समग्र रूप से देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का प्रभावी नेतृत्व और केदारनाथ–बद्रीनाथ मंदिर समिति तथा उसके अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी जी का कुशल प्रशासन—इन सभी के सामूहिक प्रयासों से चारधाम यात्रा ने नया स्वर्णिम अध्याय रचा है।

आशा है कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा मंगलमय सिद्ध होगी और अधिकाधिक संख्या में श्रद्धालु देवभूमि पधारेंगे, जिससे आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड के जनजीवन और विकास को भी नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

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