लालकुआँ में 11 जनवरी से शुरू होगा पांच दिवसीय उत्तरायणी कौतिक मेला, मकर संक्रांति पर निकलेगी गोलू देवता की भव्य शोभायात्रा

रिपोर्टर गौरव गुप्ता।
लालकुआँ उत्तरायणी मेले का पांच दिवसीय आयोजन कल 11 जनवरी, 2026 से लालकुआँ के इंटर कॉलेज मेला ग्राउंड में शुरू हो रहा है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य (झोड़ा, चांचरी),खेलकूद,एंव स्थानीय कलाकारों के रंगारंग कार्यक्रम शामिल हैं और यह आयोजित भव्य मेला 14 जनवरी मकर संक्रांति को अपने चरम पर होगा जहाँ न्याय के देवता श्री गोलू,गोल्जयू भगवान का भव्य डोले के साथ शोभायात्रा निकलेगी जो सम्पूर्ण नगर में निकाली जाएगी। उत्तरायणी मेले को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है।
बताते चले कि लालकुआँ के इंटर कालेज में 11 जनवरी से 15 जनवरी तक होने वाले पांच दिवसीय उत्तरायणी कौतिक का कल दिन रविवार को दोपहर 2 बजे विधिवत उद्घाटन होगा। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल,विशिष्ट अतिथि भाजपा के पूर्व विधायक नवीन चन्द्र दुम्का,वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरेन्द्र बोरा, पूर्व चैयरमेन रामबाबू मिश्रा सहित कई गणमान्य एवं नेताओं शामिल होगे।
इधर उत्तरायणी मेला समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि 5 दिवसीय मेले में प्रतिदिन उत्तराखण्ड के विभिन्न नामी कलाकारों के साथ साथ क्षेत्रीय कलाकारों की टीमें अपना प्रतिभाग करेगी।पहले दिन वालीवाॅल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस वर्ष मेले की विशेष आकर्षण धुरी लोकदेवता इंसाफ के देवता गोलू देवता का भव्य डोला रहेगा। उन्होंने कहा कि गोलू देवता के डोले के साथ निकलने वाली भक्ति–मय यात्रा आस्था, लोक विश्वास और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगी। दूर–दराज़ क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
मेले में लोक संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। जौनसारी, कुमाऊँनी और गढ़वाली लोकनृत्य, मांदर–ढोल की थाप, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूँज तथा स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ मेले को जीवंत बनाएँगी। कुमाऊँ की विशेष झाँकियाँ, लोकगीतों की प्रस्तुति और क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल भी मेले की शोभा बढ़ाएँगे।
उन्होंने कहा कि मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने लोकदेवताओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना प्रमुख उद्देश्य है। गोलू देवता के प्रति अद्वितीय श्रद्धा और न्याय के प्रति अटूट विश्वास से ओतप्रोत यह मेला जन–जन की आस्था का प्रतीक बनेगा। उन्होंने क्षेत्र की जनता से उत्तरायणी कौतिक मेले अधिक से अधिक संख्या में पहुचने की अपील की है।



