सरेराह हत्या से पंचकूला में सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान !

सरेराह हत्या से पंचकूला में सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान !
दक्ष दर्पण समाचार सेवा पंचकूला:
पंचकूला में इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि शहर में 11 पीसीआर, 19 आपातकालीन रिस्पांस वाहन, 25 मोटरसाइकिल राइडर द्वारा तथाकथित चौबीस घंटे गश्त करने के दावों के बावजूद सरेराह लूटपाट तथा हत्या किए जाने का समाचार कहीं ना कहीं पुलिस प्रशासन की कार्य शैली और क्षमता पर सवालिया निशान लगता है ।
उन्होंने कहा कि असल में पुलिस प्रशासन ने शहर वासियो को लुटेरों, चोर उचक्कों, हत्यारों, गुंडो तथा अपराधियों के रहमोकरम पर छोड दिया है। नागरिक भय के साए में जीने को मजबूर है। कुछ साल पहले तक पंचकूला को शांत और सुरक्षित शहर समझा जाता था । देश के कोने-कोने से लोग यहां आकर बसना चाहते थे लेकिन अब यहां भी असामाजिक तत्वों का बोलबाला हो गया है । अपहरण, चोरी डकैती, स्नेचिंग, हत्या अब आम बात हो गई है। क्योंकि उनका तंत्र पुलिस के खुफिया तंत्र से कहीं अधिक प्रभावी और कारगर है ।
रोजाना वीआईपी आवाजाही के चलते पुलिस के अधिकतर अधिकारी कर्मचारी वीआईपी ड्युटी में व्यस्त रहते हैं। छः थाने तथा एक महिला थाना, हर थाने में 60 से 70 कर्मचारी तथा ढाई से तीन हजार होमगार्ड तथा रिजर्व पुलिस फोर्स होते हुए भी असामाजिक तत्वों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ना ही नशे पर अंकुश लग पा रहा है। वर्ष 2025 में शहर में 60 से ज्यादा स्नेचिंग तथा 600 से ज्यादा चोरी की वारदातें हुई थी । इसमें से अधिकतर मामले अनसुलझे हैं ।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि कुछ साल पहले पंचकूला में पुलिस कमिश्नरी की स्थापना अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए की गई थी जिसका खूब प्रचार भी किया गया।
अतिरिक्त अधिकारी तथा कर्मचारी लगाए गए, लेकिन अपराध घटने की बजाए बढते ही गए। मनोज अग्रवाल ने पुलिस कमिश्नर से शहरवासियो को अपराधी तत्वों से सुरक्षा प्रदान करने मांग की।


