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बड़ी ख़बर: यदि हड़ताल पर गए तो नपेंगे बिजली निगम कर्मी

देहरादून: उत्तराखंड ऊर्जा विभाग से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है जहां 14 सूत्रीय मांगों लेकर बिजली के तीनों निगमों के कार्मिकों ने 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। लेकिन सरकार ने इससे पहले ही एस्मा लागू कर तीनों निगमों के कार्मिकों की छुट्टी पर रोक लगा दी है। आपको बता दें कि इस हड़ताल से तीन दिन पहले यानी रविवार से ही राज्य की विद्युत व्यवस्था वैकल्पिक कार्मिकों के सुपुर्द होगी, इसके लिए ट्रायल किया गया है।

दरअसल मुख्य सचिव डा एसएस संधु ने शासन, निगमों के आला अधिकारियों के साथ ही सभी जिलाधिकारियों व पुलिस कप्तानों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है। सभी विद्युत प्रतिष्ठानों पर पुलिस फोर्स तैनात रहेगी। दरअसल 14 सूत्रीय मांगों लेकर बिजली के तीनों निगमों के कार्मिकों ने 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। लेकिन सरकार ने इससे पहले ही एस्मा लागू कर तीनों निगमों के कार्मिकों की छुट्टी पर रोक लगा दी है।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के रुख को देखकर अब सरकार ने हड़ताल से निपटने की तैयारी की है। हड़ताल के मद्देनजर एस्मा लागू कर दिया गया है। शनिवार को ऊर्जा निगम और पिटकुल के प्रबंध निदेशक दीपक रावत ने कार्मिकों की हड़ताल को देखते हुए तमाम कार्मिकों की छुट्टी पर रोक के आदेश जारी कर दिए।

आवश्‍यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्‍मा) हड़ताल को रोकने के लिये लगाया जाता है। विदित हो कि एस्‍मा लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्‍य दूसरे माध्‍यम से सूचित किया जाता है। एस्‍मा अधिकतम छह महीने के लिये लगाया जा सकता है और इसके लागू होने के बाद अगर कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध‍ और दण्‍डनीय है।

सरकारें एस्मा लगाने का फैसला इसलिये करती हैं क्योंकि हड़ताल की वजह से लोगों के लिये आवश्यक सेवाओं पर बुरा असर पड़ने की आशंका होती है। जबकि आवश्‍यक सेवा अनुरक्षण कानून यानी एस्मा वह कानून है, जो अनिवार्य सेवाओं को बनाए रखने के लिये लागू किया जाता है। इसके तहत जिस सेवा पर एस्मा लगाया जाता है, उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते, अन्यथा हड़तालियों को छह माह तक की कैद या ढाई सौ रु. दंड अथवा दोनों हो सकते हैं।

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