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उत्तराखंड में सियासी पिच: CM धामी ने फुटबॉल, तो हरदा ने कबड्डी खेल…

धामी युवा की धड़कन नहीं! बच्चों में भी देते हैं अपना समय

देहरादून : उत्‍तराखंड में 2022 के दंगल के लिए भाजपा और कांग्रेस में जंग छिड़ी हुई है। भाजपा सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतर चुकी है। जबकि कांग्रेस में बिना ऐलान के पूर्व सीएम हरीश रावत कबड्डी खेल सियासी पारी खेलने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में 2022 के सियासी पिच पर कौन सिक्सर मारेगी और किसकी टीम जीतेगी इसके लिए अभी मार्च तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी दल मैदान में अपनी-अपनी टीम के साथ उतर चुके हैं। हालांकि सूबे की सियासत पर कब्जा पाने के लिए फाइनल मैच भाजपा और कांग्रेस के बीच ही नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा, कांग्रेस अपनी-अपनी टीम को खिताब पर कब्जा करने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं।

भाजपा की और से पुष्कर सिंह धामी बतौर सीएम करीब 6 माह के समय में ही सर्वश्रेष्ठ पारी खेलने के लिए ताबड़तोड़ बैटिंग कर रहे हैं। हालांकि केन्द्रीय नेतृत्व को धामी और युवा सरकार पर पूरा भरोसा है, ऐसे में वे धामी को धाकड़ बल्लेबाज, बेहतर गेंदबाज और आल राउंडर मान रहे हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम में धामी की धमक को लेकर सबको इंतजार रहेगा। कि क्या धामी इतिहास रचकर दोबारा सत्ता पाते हैं। या फिर क्लीन बोल्ड हो जाते हैं। धामी सियासी पिच के साथ ही खेल के मैदान में भी अपना खेल दिखाने में जुटे हैं।

दरअसल, प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को चुनावी आपाधापी के बीच कुमायूं दौरे से लौटते हुए देहरादून में बच्चों के साथ हल्के फुल्के अंदाज में फूटबाल खेलते नज़र आए। इस दौरान उन्होने खिलाड़ियों से उनके हाल चाल पूछे, हौसला बढ़ाया। इस बीच फुटबॉल खेल रहे पर प्रफुल्लित खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ सेल्फी भी ली।

आपको बता दें कि रविवार को मुख्यमंत्री कपकोट, द्वाराहाट और जागेश्वर विधानसभा विधानसभा क्षेत्र के दौरे से शाम को देहरादून वापिस लौटे। इस बीच जीटीएस हेलिपेड के पास महिंद्रा ग्राउंड में बच्चो को फूटबाल खेलता देखकर उन्होंने अपनी फ्लीट रुकवा दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खेल मैदान में मौजूद युवाओं और बच्चों से मिलकर उनका हाल चाल जाना।

उन्होने पीएम मोदी के खेलों इंडिया मुहिम की जानकारी देते उनका हौंसला भी बढ़ाया। खेल मैदान में फुटबॉल खेल रहे खिलाड़ी वह बच्चे सीएम को अपने बीच पाकर बहुत खुश हुए और उनके साथ जमकर सेल्फी ली। वहाँ मौजूद लोगों ने मुख्यमंत्री के इस अंदाज़ की जमकर तारीफ भी की।

युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सियासी पिच पर बैटिंग करें और कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत चुप बैठते। वहीं उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने जब से लालकुआं विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया है, यह सीट एकदम हॉट सीट बन गई है, हरदा लगातार चर्चाओं में है। रविवार को सुबह सुबह हरदा ने कबड्डी खेल कर फिर से सुर्खियां बटोरी हैं उन्होंने बिन्दुखत्ता में कबड्डी प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।

उधर हरदा से घबराए भाजपा के दिग्गज लगातार उन पर तंज कसते हुए घेरने का प्रयास कर रहे हैं, तो वही कांग्रेस के सदैव तारणहार रहे हरीश रावत की इस विधानसभा चुनाव में बैतरणी किस प्रकार पार लगेगी यह जिम्मेदारी लालकुआं विधानसभा सीट से अब तक दावेदारी कर रहे दिग्गज कोंग्रेसियों पर के कंधो पर टिकी हुई है। उक्त कोंग्रेसियों को आपसी तालमेल के साथ हरदा को चुनाव लड़ना होगा, क्योंकि उक्त दावेदारों के समर्थकों के बीच भी आपसी तालमेल ठीक नहीं है। उनमें आपसी सामंजस्य बिठाना भी इनके लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

टीम हरीश रावत की बात करें तो अब तक उनके द्वारा प्रभावी ढंग से चुनाव प्रचार शुरु नहीं किया गया है, उनके पुत्र आनंद रावत ने भी अभी तक लालकुआं में प्रवेश नहीं किया और ना ही कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व ही चुनाव की बाग डोर संभालने की जिम्मेदारी अब तक उठा पाया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारकों का लगातार हरीश रावत पर प्रहार जारी है।

गत दिवस वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने बयानों में कहा कि लालकुआं हरदा के लिए राजनैतिक मौत का कुआं साबित होगा, इस बार फिर वह चुनाव हारेंगे। जबकि इसके जवाब में हरदा ने नरम अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी की इस बार लालकुआं उनके लिए अमृत का कुंड साबित होने जा रहा है।

साथ ही इससे लालकुआं के साथ-साथ पूरे प्रदेश का भला होगा, उधर दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने अपने बयानों में कहा है कि राम के नाम ने हरदा को कुवे में धकेल दिया, अर्थात उनका तात्पर्य यह है कि रामनगर से चुनाव हारने के भय से उन्हें लालकुआं सीट में जाना पड़ा। कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव के लिए सियासी पारा चढ़ चुका है और हरदा के लिए यह चुनाव अब तक का सबसे बड़ा चैलेंज साबित होने जा रहा है।

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