उत्तराखंड पुलिस महकमे से बड़ी ख़बर! IG के आदेश निलंबित अधीक्षक….

अल्मोड़ा: पिछले दिनों अल्मोड़ा जेल से रंगदारी वसूलने की सूचना पर उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा जेल में की गई छापेमारी के दौरान जेल में बंद कुख्यात बदमाश कलीम के कब्जे से तीन मोबाइल 4 सिम वह ₹100000 से अधिक की नकदी बरामद होने पर कुख्यात द्वारा जेल से चलाए जा रहे वसूली नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ था।
यही नहीं अल्मोड़ा जेल में कुख्यात कलीम को उपलब्ध कराई जा रही मांस मदिरा जैसी अन्य सुविधाओं की जानकारी भी सामने आई थी। अल्मोड़ा जेल में पड़े एसटीएफ के।छापे के चलते कुख्यात के कब्जे से बरामद फोन नगदी सहित 4 सिम बरामद होने के कारण प्रदेश के कारागार विभाग की काफी किरकिरी हुई थी।
छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने अल्मोड़ा जेल में उपनल के माध्यम से तैनात ड्राइवर को भी कुख्यात कलीम के साथ मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिस पर एसटीएफ के खुलासे से साफ हो गया था कि कुख्यात कलीम को जेल क भीतर फोन सहित मांस मदिरा जैसी सभी सुविधाएंउपलब्ध हो रही थी।
कुख्यात कलीम को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में जेल अधीक्षक संजीव हयाकी सहित तीन बंदी रक्षकों को आईजी कारागार पुष्पक ज्योति ने निलंबित कर साफ संदेश दिया था, कि जेल में इस तरह की मिलीभगत को नहीं पनपने दिया जाएगा।आईजी कारागार द्वारा जारी निलंबन आदेश में निलंबन अवधि के दौरान अल्मोड़ा जेल के प्रभारी अधीक्षक रहे संजीवह्यांकी को हल्द्वानी सब जेल में संबद्ध किए जाने का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।
परंतु प्रभारी अधीक्षक अल्मोड़ा जेल रहे निलंबित संजीव ह्यांकी अभी तक हल्द्वानी जेल में अपनी संबद्धता के बजाए महा निरीक्षक कारागार के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए
प्रतिदिन बेरोकटोक अल्मोड़ा जेल में अपने कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं।
सवाल उठ रहा है कि जिस प्रकार संजीव निलंबित होते हुए भी बिना प्रवेश पंजिका में उपस्थिति दर्ज कराएं अल्मोड़ा जेल के कार्यालय में जाकर बैठ रहे हैं तो उससे जहां एक और एसटीएफ द्वारा की जा रही जांच पर असर पड़ना तय है। वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की जा रही आवाजाही अनुशासनहीनता की श्रेणी में
भी आ रही है? यही नहीं सवाल उठ रहा है कि आखिर संजीव अपने आप को किस बलबूते आईजी के आदेश से ऊपर समझ रहे हैं।