
देहरादून/उत्तराखंड।
राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड द्वारा घोषित चरणबद्ध आंदोलन कार्यक्रम के तहत आज से प्रदेशभर के आयुष चिकित्साधिकारियों में शासन एवं विभागीय व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश देखने को मिला। वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों के निराकरण न होने से नाराज चिकित्साधिकारी आज काली पट्टी बांधकर ओपीडी सेवाएं देते हुए सांकेतिक विरोध दर्ज करा रहे हैं।
प्रदेश के पर्वतीय, सीमांत एवं मैदानी जनपदों में आयुष चिकित्सकों ने मरीजों को सेवाएं देते हुए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार पत्राचार, बैठकों एवं आश्वासनों के बावजूद आज तक उनकी न्यायोचित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे पूरे संवर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है।
स्टेट मीडिया कोर्डिनेटर डॉ० डी० सी० पसबोला ने बताया कि संघ के अनुसार DACP लाभ, ACP/MACP प्रकरण, विभागीय पुनर्गठन, पदोन्नति, स्थायीकरण, अध्ययन अवकाश विसंगतियां तथा निदेशक पद पर नियमित नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मामले लंबे समय से लंबित हैं। इसके अतिरिक्त आधार आधारित बायोमेट्रिक एवं मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी चिकित्सकों में नाराजगी बनी हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क एवं तकनीकी समस्याओं के बावजूद कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि आयुष चिकित्साधिकारी विषम परिस्थितियों में भी निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन उनके सेवा हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। यही कारण है कि अब चिकित्सकों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है।
आंदोलन के प्रथम चरण के अंतर्गत 08 जून से 10 जून तक चिकित्साधिकारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। इसके बाद आंदोलन को और तेज करते हुए 13 जून को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन एवं ओपीडी बहिष्कार तथा 15 जून से प्रदेशव्यापी पूर्ण कार्य बहिष्कार एवं निदेशालय पर अनिश्चितकालीन धरना प्रस्तावित है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली एवं प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत ने कहा कि यदि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चिकित्साधिकारी संवर्ग अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाला नहीं है और अपनी मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।



