उत्तराखंड

धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरते प्रशासन : मुस्लिम सेवा संगठन

देहरादून।

मुस्लिम सेवा संगठन ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा थानों जामा मस्जिद को सील किए जाने की कार्रवाई पर गहरी चिंता, रोष और असहमति व्यक्त करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बताया है। संगठन ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से क्षेत्र के हजारों लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं तथा समाज में अनेक प्रश्न खड़े हुए हैं, जिनका उत्तर प्रशासन और सरकार को देना चाहिए।

मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने कहा कि थाना जामा मस्जिद केवल एक इमारत नहीं बल्कि वर्षों से क्षेत्र के लोगों की आस्था, इबादत, सामाजिक सहयोग, नैतिक शिक्षा और भाईचारे का केंद्र रही है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने आते हैं तथा विभिन्न सामाजिक और जनहितकारी गतिविधियां संचालित होती रही हैं। ऐसी स्थिति में मस्जिद को सील किए जाने की कार्रवाई ने स्थानीय नागरिकों को गहरे स्तर पर आहत किया है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का प्रशासनिक, तकनीकी अथवा भूमि संबंधी विवाद था तो उसका समाधान बातचीत, नोटिस, सुनवाई और वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए था। किसी धार्मिक स्थल के संबंध में सीधे कठोर कार्रवाई करना अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि पहला कदम। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

नईम कुरैशी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं के संचालन का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई करते समय संविधान की भावना, न्याय के सिद्धांतों और जनभावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में समानता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन हो।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाईयों को लेकर आम नागरिकों के बीच अनेक प्रकार की चर्चाएं और आशंकाएं उत्पन्न हुई हैं। सरकार और प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने निर्णयों के माध्यम से जनता के मन में निष्पक्षता और न्याय का विश्वास स्थापित करे। कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए और उसका प्रयोग भी बिना किसी भेदभाव के किया जाना चाहिए।

मुस्लिम सेवा संगठन के उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने कहा कि थाना जामा मस्जिद को सील किए जाने की घटना ने क्षेत्र के लोगों में असुरक्षा और चिंता का वातावरण पैदा किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। संवाद और सहमति लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और प्रशासन को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर कार्य करना चाहिए।

आकिब कुरैशी ने कहा कि उत्तराखंड सदैव आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और धार्मिक सह-अस्तित्व की मिसाल रहा है। प्रदेश की इस पहचान को बनाए रखना सरकार, प्रशासन और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचा जाना चाहिए जिससे समाज में विभाजन, अविश्वास या तनाव की स्थिति उत्पन्न हो।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम सेवा संगठन किसी भी प्रकार के टकराव या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों का समर्थन नहीं करता, लेकिन संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाना अपना दायित्व समझता है। इसी उद्देश्य से संगठन प्रदेश सरकार और प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग कर रहा है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रदेश में अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है तो उसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। किसी भी समुदाय को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।

मुस्लिम सेवा संगठन ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड से मांग की है कि:

थाना जामा मस्जिद को सील किए जाने के पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

मामले में सभी पक्षों को सुनकर न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए।

धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित किया जाए।

प्रदेश में धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समान नीति लागू की जाए।

अंत में संगठन ने कहा कि वह शांति, कानून के सम्मान और सामाजिक सौहार्द में विश्वास रखता है तथा उम्मीद करता है कि प्रदेश सरकार जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले में सकारात्मक और न्यायसंगत पहल करेगी।

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