लालकुआं में आबादी के मुहाने तक पहुंचा 6 हाथियों का झुंड “मंदिर की तारबाड़ तोड़ी, केले के पेड़ गटका; रात भर दहशत में रहे लोग

लालकुआं में आबादी के मुहाने तक पहुंचा 6 हाथियों का झुंड “मंदिर की तारबाड़ तोड़ी, केले के पेड़ गटका; रात भर दहशत में रहे लोग।
रिपोर्टर गौरव गुप्ता
लालकुआं। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अंबेडकर नगर वार्ड नंबर एक से सटे टांडा रेंज के जंगलों से निकलकर हाथियों के एक झुंड ने अचानक रिहाइशी इलाके का रुख कर लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। रविवार की देर रात टांडा रेंज के घने जंगलों से भटककर करीब आधा दर्जन हाथियों का यह दल सीधे आबादी वाले इलाके के बेहद करीब पहुंच गया।
शहर के इतने नजदीक विशालकाय वन्यजीवों की मौजूदगी से स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल बन गया और लोग रात भर अनहोनी की आशंका से सहमे रहे।
मंदिर की घेराबंदी तोड़ी, कचरा और पेड़ भी किए तहस-नहस
स्थानीय निवासियों के अनुसार जंगल की सीमा पार कर अंबेडकर नगर के समीप पहुंचे इस झुंड में एक नन्हा हाथी भी शामिल था। खाने और चारे की तलाश में आए इन हाथियों ने सबसे पहले रास्ते में स्थित एक स्थानीय मंदिर की सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की तारबाड़ को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद झुंड ने वन विभाग की दीवार के समीप उगे केले के पेड़ों को अपना निशाना बनाया और उन्हें उखाड़कर चट कर दिया। हाथियों की इस हलचल के दौरान आसपास फैले कचरे के ढेरों को भी झुंड ने सड़क पर बिखेर दिया।
बड़ी राहत जनहानि से बचाव”गश्त पर वन विभाग
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि हाथियों के इस झुंड ने किसी मकान या नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया। समय रहते हलचल का पता चलने पर वन विभाग की टीम हरकत में आई। विभाग की विशेष गश्ती टीम पूरी सतर्कता के साथ मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हाथियों को सुरक्षित तरीके से वापस टांडा रेंज के गहरे जंगलों की ओर खदेड़ने के लिए लगातार गश्त और निगरानी की कार्रवाई कर रही है।
हाथियों का आना बना रोज का डर
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि टांडा रेंज से सटे होने के कारण अंबेडकर नगर और आसपास के इलाकों में हाथियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार हाथियों के झुंड भोजन-पानी की तलाश में आबादी की तरफ आ चुके हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि रिहाइशी इलाकों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित टकराव या जान-माल के नुकसान से बचा जा सके। फिलहाल, वन विभाग इलाके में पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।



