उत्तराखंड

डोली रेंज में सागौन तस्करी: लट्ठों की संख्या में अंतर से बढ़े सवाल, यूपी कनेक्शन की चर्चा तेज

डोली रेंज में बेशकीमती सागौन के गिल्टों की तस्करी प्रकरण में यूपी कनेक्शन की चर्चाओं के बीच आंकड़ों में अंतर ने बढ़ाई जिज्ञासा” पिकअप में ज्यादा डीएफओ ने बताएं कम”तस्कर फरार।

रिपोर्टर गौरव गुप्ता।

लालकुआँ/हल्द्वानी।

लालकुआँ तराई पूर्वी वन प्रभाग डिवीजन की डोली रेंज में सागौन तस्करी का मामला अब नए सवालों के घेरे में आ गया है। जहां एक ओर पिकअप वाहन में करीब 21 सागौन के लट्ठे लदे होने की चर्चा है, वहीं मीडिया को जारी आधिकारिक बयान में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) हिमांशु बांगरी ने 12 लट्ठों की बरामदगी का जिक्र किया है। आंकड़ों में यह अंतर अब पूरे मामले को लेकर नई जिज्ञासा पैदा कर रहा है।

स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि यह अंतर संभवतः शुरुआती गिनती या रिपोर्टिंग में हुई किसी भूलवश चूक का परिणाम हो सकता है। हालांकि, इसको लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आना अभी बाकी है।

इधर डीएफओ हिमांशु बांगरी के अनुसार बीते दिवस मुखबिर द्वारा मिली संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर वन विभाग की टीम को अलर्ट कर मौके पर तैनात किया गया था। रविवार की देर रात एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की गई, जिस में सागौन के लट्ठे बरामद हुए। वाहन को मौके पर ही सीज कर लकड़ी जब्त कर ली गई है। जबकि चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। वाहन स्वामी की पहचान कर उसकी तलाश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि बरामद लकड़ी के स्रोत और गंतव्य का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। विभाग ने लकड़ी की कीमत सार्वजनिक करने से भी परहेज किया है, ताकि इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।

इधर, इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश से तार जुड़े होने की चर्चाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। माना जा रहा है कि तीलियापुर-डोली रेंज से अवैध कटान कर लकड़ी को बाहरी राज्यों तक पहुंचाने का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

इतने बड़े स्तर पर सागौन तस्करी सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल, आंकड़ों में अंतर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इसे शुरुआती चूक या गणना में हुई मामूली भूल के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब निगाहें जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं।

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