उत्तराखंड

लालकुआं में कच्ची शराब का संगठित साम्राज्य! पुलिस की कार्रवाई बेअसर, आबकारी विभाग पर उठे सवाल

लालकुआं क्षेत्र में ‘कच्ची शराब राज’! पुलिस पकड़ रही, आबकारी सो रही—माफियाओं के हौसले बुलंद!
छापेमारी में रोजाना बरामदगी, फिर भी नहीं टूट रहा नेटवर्क—आबकारी महकमे की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल!

लालकुआं। नगर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कच्ची शराब का धंधा अब सिर्फ एक गैरकानूनी गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित ‘इंडस्ट्री’ का रूप ले चुका है। हालत यह है कि पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद कच्ची शराब का नेटवर्क जड़ें जमाकर बैठा है और धंधा बेखौफ जारी है।

पुलिसिया छापेमारी में आए दिन भारी मात्रा में अवैध कच्ची शराब पकड़ी जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब हर रोज बरामदगी हो रही है, तो आखिर यह धंधा खत्म क्यों नहीं हो रहा? क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है या फिर कहीं न कहीं सिस्टम में ही बड़ी चूक है?

सबसे ज्यादा सवाल आबकारी महकमे की भूमिका पर खड़े हो रहे हैं। जिस विभाग के कंधों पर अवैध शराब पर लगाम कसने की जिम्मेदारी है, वही विभाग इस पूरे खेल में मूक दर्शक बना हुआ नजर आ रहा है। सूत्रों की मानें तो आबकारी महकमे में कुछ ऐसे अधिकारी और कर्मचारी भी हैं जो वर्षों से एक ही जगह जमे हुए तो हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर उनकी सक्रियता शून्य है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों की निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के चलते ही शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है और नए ठिकाने लगातार तैयार हो रहे हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस लगातार कार्रवाई कर सकती है, तो आबकारी विभाग क्यों पीछे है? क्या विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय होगी या फिर इसी तरह ‘मूक दर्शक’ बनकर अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता रहेगा?

लालकुआं में कच्ची शराब का यह खेल न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम जनता की सेहत और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जरूरत है सख्त और संयुक्त कार्रवाई की, वरना यह ‘कच्ची शराब राज’ और गहराता जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button