उत्तराखंड

उत्तराखंड में गन्ना-चीनी उत्पादन में भारी गिरावट: आरटीआई से बड़ा खुलासा

आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गोनिया का बड़ा खुलासा — उत्तराखंड में गन्ना और चीनी उत्पादन में भारी गिरावट, जिम्मेदार कौन?

आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गोनिया ने एक बार फिर बड़ा खुलासा करते हुए उत्तराखंड में गन्ना एवं चीनी उत्पादन के चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं।

राज्य गठन के बाद से अब तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गन्ना उत्पादन और चीनी उत्पादन में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

वर्ष 2000-01 में गन्ना पेराई 382.40 लाख कुंतल एवं चीनी उत्पादन 36.12 लाख कुंतल रहा।
वर्ष 2006-07 में गन्ना उत्पादन बढ़कर 560.76 लाख कुंतल एवं चीनी उत्पादन 53.48 लाख कुंतल के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

इसके बाद वर्ष 2008-09 में गन्ना उत्पादन गिरकर 242.11 लाख कुंतल और चीनी उत्पादन 22.28 लाख कुंतल रह गया।
वर्ष 2017-18 में गन्ना 409.14 लाख कुंतल एवं चीनी 41.90 लाख कुंतल रही, लेकिन स्थिरता नहीं बन पाई।

वर्ष 2022-23 में फिर वृद्धि दर्ज हुई और गन्ना 484.06 लाख कुंतल तथा चीनी 48.76 लाख कुंतल रही।
वर्ष 2023-24 में अचानक गिरावट आई और गन्ना 305.80 लाख कुंतल तथा चीनी 31.12 लाख कुंतल रह गई।
वर्ष 2024-25 में कुछ सुधार हुआ, लेकिन वर्ष 2025-26 (अंतरिम आंकड़े) में गन्ना मात्र 76.26 लाख कुंतल और चीनी 6.16 लाख कुंतल दर्ज की गई, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार उधम सिंह नगर और हरिद्वार गन्ना उत्पादन के मुख्य केंद्र रहे, जबकि नैनीताल और देहरादून में उत्पादन काफी कम रहा।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक गन्ना विकास, बीज बदलाव, कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया गया।

इसके बावजूद कई योजनाओं में पूरा धन खर्च नहीं हुआ और कई जगह खर्च होने के बावजूद उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

यह स्थिति सीधे तौर पर वित्तीय प्रबंधन, योजना क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बजट दिया गया तो उत्पादन क्यों गिरा?
क्या इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है या बजट देने वाले विभाग?
क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं?
क्या किसानों तक योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं पहुंच पाया?
क्या विभागीय लापरवाही और जवाबदेही की कमी इसके पीछे मुख्य कारण है?
आरटीआई से प्राप्त आंकड़े यह संकेत देते हैं कि योजनाओं और वास्तविक परिणामों के बीच भारी अंतर है।

यह मामला केवल कृषि उत्पादन का नहीं बल्कि बड़े स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का है।
आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गोनिया ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
यह खुलासा राज्य में गन्ना और चीनी उत्पादन से जुड़े पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।

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