विरासत और विकास : ‘पर्यटन को नई उड़ान देने का नायब विजन’

विरासत और विकास : ‘पर्यटन को नई उड़ान देने का नायब विजन’
लेखक : मदन मोहन छाबड़ा, पूर्व चेयरमैन, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी
गीता की उपदेशात्मक स्थली और हरि की धरा, हरियाणा की ऐतिहासिक विरासत, सांसकृतिक परंपराओं और धार्मिक स्थलों से देश में अलग पहचान है। महाभारत युद्ध से लेकर पानीपत की ऐतिहासिक लड़ाई का अध्याय इसी धरा पर लिखा गया। इन्हीं, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़कर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा को पर्यटन क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का विजन तैयार किया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वर्ष 2026-27 के बजट में हरियाणा के पर्यटन को नई उड़ान देने की तस्वीर स्पष्ट की।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भारत की सभ्तायागत धरोहर के केंद्र की परिकल्पना के तहत पानीपत युद्धभूमि व्याख्या केंद्र को एक प्रमुख सैन्य इतिहास परियोजना के रूप में 16 एड़क भूमि पर विकसित करने का विजन पेश किया है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी की नायाब सोच से विश्वपटल पर हरियाणा के पर्यटन को न केवल नई पहचान मिलेगी, बल्कि प्रदेश की धरा से कर्म का संदेश भी विश्व के हर कोने में पहुंचेगा। नायब सरकार का उद्देश्य राज्य को पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के साथ युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार मुहैया करवाना है। बहरहाल, मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रमुख माध्यम बनाने के विजन के साथ आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वर्ष 2047 तक हरियाणा को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में पर्यटन की अहम भूमिका रहेगी। पर्यटन एवं विरासत के क्षेत्र में पिंजौर में आधुनिक फिल्म सिटी, पानीपत में युद्धभूमि व्याख्या केंद्र तथा फरीदाबाद में अरावली गोल्फ कोर्स को विश्वस्तरीय स्तर पर विकसित करने का प्रस्ताव राज्य को नई पहचान देगा।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पर्यटन एवं विरासत को नई उड़ान देने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 105 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि हरियाणा पर्यटन बनने की राह पर अग्रसर है। वर्ष 2025-26 में पर्यटन एवं विरासत का बजट 185 करोड़ था, जबकि 2026-27 में इसे बढ़ाकर 380 करोड़ किया गया है।
इसके साथ ही कला एवं संस्कृति क्षेत्र में भी 76 प्रतिशत बजट की बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2025-26 में बजट 75 करोड़ था, जिसे बढ़ाकर 132 करोड़ रुपये किया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में राज्य सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। हरियाणा को फिल्म निर्माण एवं डिजिटल मीडिया का केंद्र बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026-27 में पिंजौर में आधुनिक फिल्म सिटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
भारत की सभ्तायागत धरोहर के केंद्र की परिकल्पना के तहत पानीपत युद्धभूमि व्याख्या केंद्र को एक प्रमुख सैन्य इतिहास परियोजना के रूप में 16 एड़क भूमि पर विकसित किया जाएगा। फरीदाबाद में हरियाणा के सबसे पुराने अरावली गोल्फ कोर्स को आधुनिक मानकों के अनुरूप उन्नत करते हुए एक विश्वस्तरीय रिक्रिएशन एवं स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 में कम आय वाले परिवारों को बुजुर्गों को अयोध्या तीर्थ के दर्शन और प्रयागराज के महाकुंभ में संगम स्नान करवाया गया।
वर्ष 2026-27 में तीर्थ यात्रियों को शिरड़ी, माता वैष्णों देवी और गुरुद्वारा श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर की यात्राएं शुरू करवाने का प्रस्ताव है। स्टेट यूर्निवसिटी ऑफ प्रोफार्मिंग एंड विजुअल आर्ट रोहतक के सहयोग से प्रतिवर्ष हरियाणा फिल्म फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। क्षेत्रीय सिनेमा, स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं, छात्र रचनाकारों एवं डाक्यूमेंट्री निर्माताओं को नया मंच मिलेगा। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में राखीगढ़ी को एक आइकॉनिक आर्कियोलॉजिकल साइट बताया है, इसे एक टूरिज्म डेस्टिनेशन में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत कम आय वाले परिवारों के बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन करवाने की पहल ने सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वर्ष 2025 में श्रद्धालुओं को अयोध्या और प्रयागराज के महाकुंभ में संगम स्नान का अवसर मिला। अब 2026-27 में शिरड़ी, माता वैष्णो देवी और गुरुद्वारा श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर की यात्राएं शुरू करने का प्रस्ताव है। इन यात्राओं को ई-बसों से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण और सुविधा दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है
पिंजौर में फिल्म सिटी: हरियाणा को फिल्म निर्माण एवं डिजिटल मीडिया का केंद्र बनाने के उद्देश्य से पिंजौर में आधुनिक फिल्म सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। पिंजौर अपने ऐतिहासिक उद्यानों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहले से प्रसिद्ध है।
यहां फिल्म सिटी बनने से राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान मिलेगी। इसके साथ ही स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के सहयोग से प्रतिवर्ष हरियाणा फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने का निर्णय रचनात्मक प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायक साबित होगा। इससे स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं, छात्र रचनाकारों और डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योग भी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिल्म सिटी का सपना इसी नायब सोच का विस्तार है।
पानीपत युद्धभूमि व्याख्या केंद्र: भारत की सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित और प्रस्तुत करने की दिशा में पानीपत युद्धभूमि व्याख्या केंद्र को 16 एकड़ भूमि पर विकसित करने की योजना अत्यंत महत्वाकांक्षी है। पानीपत भारतीय इतिहास की तीन ऐतिहासिक लड़ाइयों का साक्षी रहा है। इस व्याख्या केंद्र के माध्यम से सैन्य इतिहास को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सके। यह परियोजना हरियाणा को सैन्य इतिहास पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर सकती है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अरावली गोल्फ कोर्स: फरीदाबाद स्थित हरियाणा के सबसे पुराने अरावली गोल्फ कोर्स को आधुनिक मानकों के अनुरूप उन्नत करने का प्रस्ताव भी पर्यटन के विविधीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। अरावली गोल्फ कोर्स को विश्वस्तरीय रिक्रिएशन एवं स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। अरावली की प्राकृतिक पृष्ठभूमि के बीच विकसित यह परियोजना राज्य में उच्चस्तरीय खेल पर्यटन को बढ़ावा देगी। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट आयोजित करने की संभावना भी बढ़ेगी।
राखीगढ़ी: भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में राखीगढ़ी को एक आइकॉनिक आर्कियोलॉजिकल साइट घोषित किया गया है। यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख केंद्रों में से एक है। इसे एक विकसित टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में तैयार करने से हरियाणा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है। राखीगढ़ी का संरक्षण और वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण राज्य के लिए सांस्कृतिक गौरव का विषय है। इससे इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।




